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ग्रेटर नोएडा में नवजात बच्ची की खरीद-फरोख्त का बड़ा खुलासा, अस्पताल स्टाफ की भूमिका पर उठे सवाल

 

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित बिसरख थाना क्षेत्र में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां नवजीवन अस्पताल में नवजात बच्ची की खरीद-फरोख्त का गंभीर खुलासा हुआ है। इस मामले ने न केवल पुलिस प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस जांच में यह सामने आया है कि इस पूरे मामले की मुख्य आरोपी अस्पताल की संचालिका यशिका गर्ग है। आरोप है कि उसी के निर्देश पर अस्पताल के कर्मचारियों ने नवजात बच्ची को बेचने के लिए ग्राहक तलाशने का काम शुरू किया। जांच में यह भी पता चला है कि इस अवैध गतिविधि में अस्पताल के कई कर्मचारी भी शामिल थे, जिन्होंने इस कृत्य को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई।

पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में टेक्नीशियन रणजीत सिंह और सफाई कर्मचारी गजेंद्र की भी संलिप्तता सामने आई है। इन दोनों पर आरोप है कि इन्होंने ग्राहक खोजने और सौदे को आगे बढ़ाने में मदद की। इसके अलावा, इस मामले में नर्स पुष्पा और उसके बॉयफ्रेंड की भूमिका भी सामने आई है, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि इन दोनों ने सौदे को अंतिम रूप देने में सक्रिय भूमिका निभाई।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि बच्ची की खरीद-फरोख्त के लिए 2.60 लाख रुपये में सौदा तय किया गया था। इस अवैध लेन-देन में शामिल सभी लोगों ने मिलकर ग्राहक तलाशने से लेकर डील फाइनल करने तक की पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया। यह मामला मानव तस्करी और चिकित्सा पेशे की आड़ में हो रहे गंभीर अपराध की ओर इशारा करता है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की गहराई से जांच की जा रही है और इसमें शामिल अन्य लोगों की भी तलाश जारी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा है और क्या इससे पहले भी इस तरह की घटनाएं की गई हैं।

इस घटना के सामने आने के बाद आम लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब एक अस्पताल, जिसे लोगों के जीवन की रक्षा का स्थान माना जाता है, वही इस तरह के अपराध का केंद्र बन जाए, तो भरोसा कहां बचेगा। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल पुलिस ने मुख्य आरोपी यशिका गर्ग सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। यह मामला एक बार फिर इस बात की चेतावनी देता है कि अवैध गतिविधियों पर सख्त निगरानी और कड़ी कार्रवाई कितनी जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह के अपराधों को रोका जा सके।