श्रीराम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव: अब CEO संभालेगा अयोध्या मंदिर की जिम्मेदारी, वीडियो में देंखे रिटायर्ड अधिकारी को मिलेगी कमान
अयोध्या में बन रहे भव्य श्रीराम मंदिर के प्रबंधन को और बेहतर बनाने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा फैसला लिया है। अब मंदिर की प्रशासनिक जिम्मेदारियां मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के हाथों में सौंपी जाएंगी। हालांकि, ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि इस पद पर किसी मौजूदा IAS अधिकारी की नियुक्ति नहीं की जाएगी, बल्कि किसी रिटायर्ड अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाएगी।
ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, इसके पीछे मुख्य वजह मंदिर प्रबंधन की स्वतंत्रता को बनाए रखना है। उनका कहना है कि अगर कोई कार्यरत IAS अधिकारी CEO बनाया जाता है तो मंदिर का प्रशासनिक नियंत्रण अप्रत्यक्ष रूप से सरकार के पास जाने की संभावना बढ़ सकती है। जबकि वर्तमान व्यवस्था में श्रीराम मंदिर ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था के रूप में काम कर रहा है।
ट्रस्ट के एक पदाधिकारी ने बताया कि रिटायर्ड अधिकारी के CEO बनने से उनकी जवाबदेही केवल ट्रस्ट के प्रति होगी। वह सरकार की प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त होंगे और पूरी तरह मंदिर प्रबंधन, व्यवस्था और विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
हालांकि, देश के कई बड़े मंदिरों में प्रशासनिक व्यवस्था संभालने के लिए सरकारी अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाती है। उदाहरण के तौर पर काशी विश्वनाथ मंदिर और उज्जैन के महाकाल मंदिर में CEO जैसे पदों पर अक्सर IAS या PCS अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है। लेकिन अयोध्या में ट्रस्ट ने अलग मॉडल अपनाने का फैसला किया है।
जानकारी के मुताबिक, आगामी 22 जुलाई को श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के सामने CEO पद के लिए तीन नामों का पैनल रखा जाएगा। ट्रस्टी इन नामों में से एक व्यक्ति का चयन करेंगे। नियुक्ति के बाद CEO की भूमिका, अधिकार और जिम्मेदारियों का पूरा ब्लूप्रिंट भी तैयार किया जाएगा।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने कहा कि ट्रस्ट के गठन के समय यह अनुमान नहीं लगाया गया था कि मंदिर संचालन के लिए पेशेवर प्रबंधन की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि बाद में मंदिर से जुड़े मामलों और चढ़ावे की व्यवस्था को लेकर सामने आई चुनौतियों के बाद ट्रस्ट को एक अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी की जरूरत महसूस हुई।
गोविंद देव गिरि ने कहा, "CEO ट्रस्ट के लिए जवाबदेह होगा, सरकार के लिए नहीं। इसलिए रिटायर्ड IAS अधिकारी या उसके समकक्ष योग्यता रखने वाले व्यक्ति को इस पद की जिम्मेदारी दी जाएगी।"
श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, चढ़ावे की व्यवस्था, सुरक्षा, कर्मचारियों का प्रबंधन, निर्माण कार्यों की निगरानी और भविष्य की योजनाओं को देखते हुए CEO का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ट्रस्ट का मानना है कि एक अनुभवी और पेशेवर अधिकारी की नियुक्ति से मंदिर की व्यवस्थाओं को आधुनिक तरीके से संचालित किया जा सकेगा। साथ ही, मंदिर की धार्मिक गरिमा और प्रशासनिक स्वतंत्रता दोनों को बनाए रखने में मदद मिलेगी। अब सभी की नजरें 22 जुलाई को होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जिसमें नए CEO के नाम पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।