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लखनऊ में सैकड़ों जमीन खरीदारों को बड़ा झटका, रजिस्ट्री होगी कैंसिल; नहीं मिलेगा मुआवजा

 

राजधानी लखनऊ में जमीन खरीदकर घर बनाने या निवेश करने वाले सैकड़ों लोगों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सुशांत गोल्फ सिटी परियोजना से जुड़े एक मामले में नियमों का उल्लंघन कर खरीदे गए भूखंडों की रजिस्ट्री और आवंटन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे खरीदार शामिल हैं, जिन्होंने जमीन खरीदते समय यह दावा किया जा रहा है कि भूखंड के बंधक होने की स्थिति से वे अनजान थे।

हालिया आदेश के अनुसार, कंसोर्टियम के नियमों का उल्लंघन कर खरीदे गए 846 भूखंडों के आवंटन और बैनामे निरस्त कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इन भूखंडों की कुल कीमत करीब 1000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। खास बात यह है कि इन खरीदारों को लखनऊ विकास प्राधिकरण की ओर से मुआवजा नहीं दिया जाएगा।

नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई

मामला सुशांत गोल्फ सिटी में जमीन के आवंटन और बिक्री से जुड़ा है। शासन स्तर से जारी निर्देश के बाद ऐसे बैनामों को कानून की नजर में अमान्य घोषित कराने के लिए सक्षम न्यायालय में कार्रवाई करने को कहा गया है। यानी जिन भूखंडों की खरीद-बिक्री निर्धारित नियमों के विपरीत हुई है, उनकी वैधता पर सवाल खड़ा हो गया है।

इससे पहले भी सुशांत गोल्फ सिटी परियोजना में बड़ी संख्या में भूखंडों को लेकर कार्रवाई की बात सामने आई थी। सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट में 2747 भूखंडों की रजिस्ट्री निरस्त करने का प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी दी गई थी। इनमें 440 भूखंडों पर बड़े मकान और 81 भूखंडों पर आंशिक निर्माण होने की बात सामने आई थी।

कुछ खरीदारों की रजिस्ट्री बचाने का फैसला भी

इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण अंतर भी सामने आया है। अंसल द्वारा एलडीए के पास बंधक रखे गए 2747 भूखंडों के संबंध में बाद में एलडीए ने कहा था कि वैध आवंटियों के हितों को देखते हुए इन बंधक भूखंडों की रजिस्ट्री निरस्त नहीं कराई जाएगी। एलडीए ने इन भूखंडों को अवमुक्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही थी।

इसलिए सभी खरीदारों की रजिस्ट्री एक ही आधार पर रद्द होगी, ऐसा मानना सही नहीं होगा। कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित भूखंड किस श्रेणी में आता है और उसकी बिक्री किन परिस्थितियों में हुई थी।

खरीदारों की बढ़ी चिंता

रजिस्ट्री निरस्त होने की स्थिति में उन लोगों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है, जिन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई जमीन खरीदने में लगाई है। कई भूखंडों पर निर्माण हो चुका है, ऐसे में स्वामित्व और निर्माण दोनों को लेकर कानूनी स्थिति जटिल हो सकती है।

वहीं, उत्तर प्रदेश में भविष्य में ऐसी समस्याओं को रोकने के लिए रजिस्ट्री से पहले संपत्ति के मालिकाना हक की जांच की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में रजिस्ट्री, खसरा-खतौनी, नामांतरण और हस्तांतरण अधिकार जैसे दस्तावेजों की जांच का प्रावधान है।

ऐसे में सुशांत गोल्फ सिटी के प्रभावित खरीदारों के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होगी। रजिस्ट्री निरस्तीकरण और मुआवजे से जुड़े अंतिम अधिकार संबंधित आदेश और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेंगे।