बस्ती के सामाजिक कार्यकर्ता आकाश गुप्ता को राष्ट्रपति भवन से मिला निमंत्रण, मनोरमा नदी की सफाई के लिए सम्मान
बस्ती जिले के लजघटा गांव निवासी सामाजिक कार्यकर्ता आकाश गुप्ता को 15 अगस्त के राष्ट्रीय समारोह में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति भवन से विशेष निमंत्रण मिला है। आकाश गुप्ता को यह सम्मान मनोरमा नदी की सफाई और जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए मिला है।
आकाश गुप्ता ने चार महीने तक लगातार श्रमदान कर मनोरमा नदी के एक हिस्से की सफाई की। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर नदी के करीब 400 मीटर हिस्से को साफ किया और लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया।
चार महीने तक किया श्रमदान
जानकारी के अनुसार, मनोरमा नदी लंबे समय से गंदगी और उपेक्षा का सामना कर रही थी। नदी की स्थिति सुधारने के उद्देश्य से आकाश गुप्ता ने ग्रामीणों के सहयोग से सफाई अभियान शुरू किया। उन्होंने खुद श्रमदान करते हुए नदी के गंदे हिस्सों की सफाई की।
करीब चार महीने तक चले इस अभियान में उन्होंने नदी से कचरा हटाने और जल स्रोत को स्वच्छ बनाने का प्रयास किया। उनके इस अभियान में स्थानीय लोगों ने भी भागीदारी की और जल संरक्षण का संदेश दिया।
ग्रामीणों को किया जागरूक
आकाश गुप्ता ने केवल नदी की सफाई तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने ग्रामीणों को जल संरक्षण और पर्यावरण बचाने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने लोगों को बताया कि नदियां और जल स्रोतों को स्वच्छ रखना सभी की जिम्मेदारी है।
उनके प्रयासों से ग्रामीणों में भी जागरूकता बढ़ी और कई लोग नदी संरक्षण अभियान से जुड़े। स्थानीय स्तर पर किए गए इस काम की सराहना हुई।
राष्ट्रपति भवन से मिला विशेष निमंत्रण
आकाश गुप्ता के सामाजिक कार्यों को देखते हुए उन्हें 15 अगस्त के राष्ट्रीय समारोह में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति भवन से विशेष निमंत्रण भेजा गया है। यह उनके लिए और पूरे बस्ती जिले के लिए गौरव का अवसर माना जा रहा है।
राष्ट्रपति भवन से मिले निमंत्रण के बाद आकाश गुप्ता ने इसे अपने प्रयासों और ग्रामीणों के सहयोग का सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों को पहचान मिलना समाज के लिए प्रेरणादायक है।
जल संरक्षण की दिशा में मिसाल
आकाश गुप्ता का यह प्रयास बताता है कि सामूहिक भागीदारी और इच्छाशक्ति से स्थानीय स्तर पर बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। मनोरमा नदी की सफाई का अभियान अब अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।
15 अगस्त के राष्ट्रीय समारोह में उनकी भागीदारी न केवल उनके व्यक्तिगत सम्मान का अवसर है, बल्कि उन सभी ग्रामीणों के प्रयासों की पहचान भी है जिन्होंने नदी संरक्षण में सहयोग किया।