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विधवा पत्नी की FD नहीं तोड़ सकता बैंक, पति के कर्ज की वसूली पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; SBI को पैसे लौटाने के साथ मुआवजा देने का आदेश

 

लखनऊ हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पति के कर्ज की वसूली के लिए विधवा पत्नी की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तोड़ने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति के कर्ज की वसूली के लिए बैंक विधवा पत्नी की व्यक्तिगत जमा राशि को उसकी सहमति के बिना नहीं तोड़ सकता। मामले में हाईकोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को महिला की रकम वापस करने के साथ मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।

पति के कर्ज की वसूली में तोड़ी गई FD

मामला एक विधवा महिला की फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़ा है। महिला ने अपनी जमा पूंजी बैंक में सुरक्षित रखी थी। आरोप है कि पति के कर्ज की वसूली के लिए बैंक ने उसकी FD को तोड़कर रकम का इस्तेमाल कर लिया। इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अपनी जमा राशि वापस दिलाने की मांग की।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बैंक की कार्रवाई पर सवाल उठाए। अदालत ने माना कि पति और पत्नी की संपत्ति तथा वित्तीय देनदारियों को अलग-अलग देखा जाना चाहिए। केवल इस आधार पर कि महिला का पति बैंक का कर्जदार था, उसकी व्यक्तिगत जमा राशि को कर्ज की वसूली में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

SBI को रकम लौटाने का आदेश

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने भारतीय स्टेट बैंक को महिला की FD की रकम वापस करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही बैंक को मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया है। अदालत के इस फैसले से उन लोगों को राहत मिल सकती है, जिनकी व्यक्तिगत जमा राशि पर परिवार के किसी अन्य सदस्य के कर्ज की वजह से कार्रवाई की जाती है।

हालांकि, मामले में FD की कुल रकम, मुआवजे की सटीक राशि और बैंक को भुगतान के लिए दी गई समयसीमा जैसी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

पति का कर्ज और पत्नी की संपत्ति अलग

कानूनी जानकारों के अनुसार, किसी व्यक्ति की बैंक देनदारी अपने आप उसके पति या पत्नी की व्यक्तिगत संपत्ति पर अधिकार नहीं देती। यदि पत्नी ने पति के कर्ज के लिए गारंटी नहीं दी है या किसी कानूनी दायित्व के तहत जिम्मेदार नहीं है, तो उसकी निजी संपत्ति को वसूली के लिए इस्तेमाल करने का सवाल अलग तरीके से देखा जाएगा।

यह फैसला बैंकिंग व्यवस्था में ग्राहकों की जमा राशि और संपत्ति अधिकारों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर विधवा महिलाओं के लिए, जिनकी बचत उनके जीवनयापन और आर्थिक सुरक्षा का आधार होती है।

बैंक ग्राहकों के लिए क्या मायने?

हाईकोर्ट के इस आदेश से यह संदेश मिलता है कि बैंक किसी ग्राहक की व्यक्तिगत जमा राशि पर कार्रवाई करते समय कानूनी अधिकार और संबंधित व्यक्ति की जिम्मेदारी का ध्यान रखे। यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके खाते या FD पर गलत तरीके से कार्रवाई की गई है, तो वह बैंक में शिकायत करने के साथ कानूनी उपाय भी अपना सकता है।

हालांकि, हर मामले के तथ्य अलग होते हैं। इसलिए किसी भी विवाद में संबंधित अदालत के आदेश और लागू कानून के आधार पर ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।