×

आयुष्मान योजना में निजी अस्पतालों की मनमानी का खुलासा, आईसीयू में दिखाकर बनाते थे ज्यादा बिल

 

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (सांचीज) में कई निजी अस्पतालों द्वारा मरीजों के साथ की जा रही धोखाधड़ी और मनमानी का खुलासा हुआ है। स्टेट हेल्थ एजेंसी द्वारा की गई जांच में यह सामने आया कि कुछ अस्पताल मरीजों को बिना जरूरत के आईसीयू में भर्ती दिखाकर अधिक बिल बनाते थे, ताकि योजना के तहत अधिक धनराशि प्राप्त की जा सके।

सूत्रों के अनुसार, जब स्टेट हेल्थ एजेंसी ने आईसीयू में भर्ती मरीजों को दी गई दवाओं और जांचों का विवरण मांगा, तो अस्पतालों की पोल खुल गई। जांच में यह तथ्य सामने आया कि मरीजों को वास्तविक रूप से आईसीयू की सुविधाओं की जरूरत नहीं थी, लेकिन बिल बढ़ाने के लिए उन्हें आईसीयू में भर्ती दिखाया गया।

इस खुलासे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि योजना के लाभार्थियों के साथ कुछ निजी अस्पताल अनैतिक और गैरकानूनी तरीके अपना रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की धोखाधड़ी न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए भी सावधानी और भरोसे की समस्या पैदा करती है।

स्टेट हेल्थ एजेंसी ने बताया कि अब सभी ऐसे मामलों की गहन जांच और ऑडिट प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके तहत अस्पतालों से बिलिंग, दवाओं और जांचों के वास्तविक दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। यदि जांच में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और योजना से प्रतिबंध लगाने की संभावना है।

आयुष्मान योजना के तहत यह अनियमितता देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि योजना का मूल उद्देश्य गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन कुछ अस्पताल इसे सिर्फ मुनाफाखोरी का जरिया बना रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने सभी आयुष्मान योजना के अस्पतालों को चेतावनी दी है कि वे मरीजों के हित और योजना की शर्तों का पालन करें। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि अब सभी अस्पतालों की नियमित निगरानी और ऑडिट होगी, ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी न हो सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। मरीज और उनके परिवार दिए गए बिल, जांच और दवाओं के विवरण की जांच करें और किसी भी अनियमितता की सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग को दें।

इस मामले ने यह दिखा दिया है कि पब्लिक-प्राइवेट भागीदारी वाली स्वास्थ्य योजनाओं में निगरानी और पारदर्शिता अत्यंत जरूरी है। आयुष्मान योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को उचित और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है, लेकिन मनमानी और भ्रष्टाचार इसे खतरे में डाल सकता है।

स्टेट हेल्थ एजेंसी का कहना है कि इस खुलासे के बाद अब सभी अस्पतालों में सख्त नियम और ऑडिट प्रक्रिया लागू की जाएगी। भविष्य में मरीजों को सुरक्षित और पारदर्शी इलाज सुनिश्चित करने के लिए यह कदम आवश्यक है।

इस प्रकार, आयुष्मान योजना में निजी अस्पतालों की मनमानी का खुलासा न केवल स्वास्थ्य प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सख्त निगरानी और जवाबदेही कितनी महत्वपूर्ण है।