अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला, सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, फुटेज में जाने CBI जांच और नई SIT गठन की मांग पर होगी बहस
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच इस मामले से जुड़ी तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इन याचिकाओं में मामले की जांच सीबीआई को सौंपने, नई एसआईटी गठित करने और मंदिर में दान एवं चढ़ावे के प्रबंधन की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए किसी स्वतंत्र एजेंसी को जिम्मेदारी दी जाए। इसके अलावा मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करने की मांग भी की गई है।
वहीं, अयोध्या पुलिस सोमवार को मामले में गिरफ्तार किए गए सभी 8 आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश करेगी। इन आरोपियों की पुलिस रिमांड आज समाप्त हो रही है। माना जा रहा है कि इस दौरान पुलिस कुछ आरोपियों की आगे की पूछताछ के लिए दोबारा रिमांड की मांग कर सकती है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के करीबी बताए जा रहे रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और चढ़ावा गिनती के प्रभारी रहे सुभाष श्रीवास्तव की सात दिन की रिमांड मांगी जा सकती है। इससे पहले पुलिस ने आरोपी अविनाश, अनुकल्प, लवकुश और करुणेश को रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी।
मामले में गिरफ्तार सभी आरोपियों को फिलहाल फैजाबाद जेल में अलग-अलग बैरक में रखा गया है। पुलिस जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी कैसे हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।
इस बीच, तपस्वी छावनी के जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने भी गड़बड़ी की है तो उसे किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि कुछ दलों को इस मामले में आरोप लगाने का अधिकार नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन की टीम 22 जुलाई के बाद मंदिर प्रशासन की जिम्मेदारी संभाल सकती है। इसको लेकर ट्रस्ट स्तर पर मंथन चल रहा है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला सामने आने के बाद मंदिर की सुरक्षा, दान व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर कई सवाल उठे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। कोर्ट के रुख से तय होगा कि मामले की जांच किस एजेंसी को सौंपी जाएगी और आगे की प्रक्रिया किस दिशा में जाएगी।