अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सियासत तेज, वीडियो में जाने शंकराचार्य और पूर्व अधिकारी के आरोपों से गरमाया मामला
Ayodhya स्थित श्री राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित 7 करोड़ रुपये की चोरी के दावे को लेकर राजनीतिक और धार्मिक विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में अलग-अलग पक्षों की ओर से लगाए जा रहे आरोपों ने माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गुरुवार को एटा में बयान देते हुए कहा कि मंदिर में शिला पूजन के समय से ही अनियमितताओं और चोरी के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब जमीन और प्लॉटों की बिक्री को लेकर भी कई सवाल उठे थे। उनके अनुसार, “दो-दो मिनट में करोड़ों के प्लॉट बिक जाते थे,” और उन्होंने मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए।
उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai का नाम लेते हुए कहा कि व्यवस्था और संचालन को लेकर कई शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं। उनके बयान के बाद यह मुद्दा धार्मिक के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन गया है।इस विवाद के बीच खुद को मंदिर का पूर्व लेखा प्रभारी बताने वाले महिपाल सिंह ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मंदिर में चोरी की घटनाएं नई नहीं हैं और यह पहले से होती रही हैं। उनके अनुसार, उन्होंने एक बार चोरी पकड़ी थी और इसकी शिकायत भी चंपत राय और गोपाल जी से की थी, लेकिन इसके बाद उन्हें उनके पद से हटा दिया गया।
महिपाल सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की लगभग आठ महीने पुरानी फुटेज कथित तौर पर डिलीट करवाई गई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर की व्यवस्थाओं में मनमानी चलती है और जो भी व्यक्ति इसका विरोध करता है, उसे किनारे कर दिया जाता है।इन आरोपों के बाद मामला अब केवल प्रशासनिक विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। हालांकि, अब तक श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक और विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
धार्मिक और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आरोप यदि लगातार बढ़ते रहे, तो यह मंदिर से जुड़े सार्वजनिक विश्वास और पारदर्शिता की बहस को और तेज कर सकते हैं। वहीं, समर्थकों का कहना है कि बिना ठोस सबूतों के लगाए गए आरोपों से अनावश्यक विवाद पैदा हो रहा है।फिलहाल पूरा मामला जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण की प्रतीक्षा में है, जबकि सियासी हलकों में इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी जारी है।