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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावे को लेकर विवाद: चोरी के आरोप, वीडियो में देंखे ट्रस्ट की सफाई और ऑडिट प्रक्रिया पर सवाल

 

अयोध्या में स्थित भव्य राम मंदिर के चढ़ावे (दान राशि) की गिनती और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। मंदिर में प्राप्त होने वाले दान को लेकर कुछ नेताओं द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया है। 7 जून को उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने आरोप लगाया था कि राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे में लगभग साढ़े सात करोड़ रुपये तक की गड़बड़ी या चोरी हुई है। इसके बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मामले पर सवाल उठाते हुए दान की प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका जताई।

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इन आरोपों के सामने आने के बाद मामला और अधिक तूल पकड़ गया, जिसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से स्थिति स्पष्ट करने के लिए बयान जारी किया गया। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे का पूरा ऑडिट किया जा रहा है और किसी भी प्रकार की चोरी या अनियमितता के आरोप तथ्यहीन हैं।उन्होंने स्पष्ट किया कि दान राशि की गणना और प्रबंधन एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाता है और सभी रिकॉर्ड्स की जांच की जा रही है। ट्रस्ट ने यह भी कहा कि मंदिर निर्माण और संचालन से जुड़ी सभी वित्तीय गतिविधियां पारदर्शी ढंग से की जाती हैं।

हालांकि, इस विवाद के बीच 10 जून को एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने मंदिर ट्रस्ट से इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली। इसके बाद इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर भी निगरानी और जांच की चर्चा तेज हो गई है।दूसरी ओर, देश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों का उदाहरण भी सामने आ रहा है, जहां बड़े स्तर पर दान राशि आने के बावजूद ऑडिट सिस्टम को पारदर्शी और मजबूत बताया जाता है। इनमें तिरुपति बालाजी मंदिर, शिरडी साईंबाबा मंदिर और सांवलिया सेठ मंदिर शामिल हैं, जहां हर दिन करोड़ों रुपये का दान प्राप्त होता है।

इन मंदिरों में आधुनिक अकाउंटिंग सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी और नियमित ऑडिट प्रक्रिया के माध्यम से वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने का दावा किया जाता है। इसी कारण इन संस्थानों की दान व्यवस्था को अपेक्षाकृत अधिक व्यवस्थित माना जाता है।फिलहाल राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे ये सवाल राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक चर्चा का विषय बने हुए हैं। ट्रस्ट की सफाई और चल रही ऑडिट प्रक्रिया के बीच अब सभी की नजरें आने वाली आधिकारिक रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जो इस विवाद को स्पष्ट दिशा दे सकती है।