उत्तर प्रदेश में अगस्त की बारिश ने तोड़े कई रिकॉर्ड, 100 साल में दूसरी बार बरसे इतने बादल; फिर भी सीजन की बारिश औसत से कम
उत्तर प्रदेश में इस बार अगस्त महीने में हुई भारी बारिश ने कई पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में अगस्त के दौरान सामान्य से कहीं अधिक बारिश दर्ज की गई। मौसम के आंकड़ों के मुताबिक, करीब सौ वर्षों के रिकॉर्ड में यह दूसरी बार है जब अगस्त में इतनी ज्यादा बारिश हुई है। हालांकि, मानसून सीजन की कुल बारिश पर नजर डालें तो प्रदेश में अब भी बारिश सामान्य औसत से कम बनी हुई है।
अगस्त में बदले मौसम के मिजाज ने उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में जनजीवन को प्रभावित किया। लगातार बारिश के कारण कई जिलों में जलभराव की स्थिति बनी, जबकि नदियों और नालों का जलस्तर भी बढ़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में पानी भरने से फसलों पर असर पड़ा। वहीं, शहरों में जल निकासी की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। कई स्थानों पर सड़कों पर पानी जमा होने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा।
अगस्त में बारिश ने बनाया नया रिकॉर्ड
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अगस्त में उत्तर प्रदेश में हुई बारिश असाधारण रही। कई जिलों में बारिश ने पुराने रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए। लंबे समय के मौसम रिकॉर्ड से तुलना करने पर यह अगस्त प्रदेश के सबसे ज्यादा बारिश वाले महीनों में शामिल हो गया है। करीब 100 साल के आंकड़ों में अगस्त महीने में इससे अधिक बारिश का रिकॉर्ड केवल एक बार दर्ज किया गया है।
बारिश का सबसे ज्यादा असर उन इलाकों में देखने को मिला जहां कम समय में बड़ी मात्रा में पानी बरसा। कई जगहों पर तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भर गया। ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे रास्तों और संपर्क मार्गों पर भी आवागमन प्रभावित हुआ।
फिर भी पूरे मानसून सीजन में बारिश कम
अगस्त की रिकॉर्ड बारिश के बावजूद उत्तर प्रदेश में पूरे मानसून सीजन की तस्वीर अभी अलग है। जून से लेकर अगस्त तक की कुल बारिश को देखा जाए तो प्रदेश में वर्षा सामान्य औसत से नीचे बनी हुई है। इसका मतलब है कि मानसून की शुरुआत में हुई कम बारिश की भरपाई अगस्त की तेज बारिश के बावजूद पूरी तरह नहीं हो सकी है।
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून के दौरान बारिश का वितरण बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि बारिश कुछ ही दिनों या एक महीने में केंद्रित हो जाए तो कुल आंकड़ा भले ही बढ़ जाए, लेकिन खेती और जल संसाधनों के लिहाज से इसका लाभ सामान्य रूप से पूरे सीजन में हुई बारिश जितना नहीं होता।
किसानों के लिए बारिश बनी राहत और चिंता दोनों
अगस्त में हुई बारिश ने कई इलाकों में किसानों को राहत भी दी। जिन क्षेत्रों में पहले बारिश की कमी थी, वहां खेतों को पर्याप्त पानी मिला। धान समेत खरीफ की कई फसलों के लिए बारिश उपयोगी साबित हुई। हालांकि, अत्यधिक बारिश वाले क्षेत्रों में खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान की आशंका भी बनी हुई है।
आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधि यह तय करेगी कि उत्तर प्रदेश में पूरे सीजन की बारिश सामान्य स्तर तक पहुंचती है या नहीं। फिलहाल अगस्त की रिकॉर्ड बारिश ने प्रदेश के मौसम इतिहास में जरूर एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है।