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अपना दल (एस) ने बागी नेताओं पर साधा निशाना, मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर की सरकारी पदों से हटाने की मांग

 

उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ गठबंधन दल अपना दल (एस) और पार्टी से निष्कासित बागी नेताओं के बीच अब टकराव खुलकर सामने आ गया है। पार्टी से तीन साल पहले निकाले गए चौधरी ब्रजेंद्र सिंह पटेल और बौद्ध अरविंद पटेल द्वारा लगातार पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और खुलेआम मोर्चा खोलने के बाद, अपना दल (एस) ने अब उनके खिलाफ राजनीतिक मोर्चेबंदी शुरू कर दी है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जाटव आर. पी. गौतम ने बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मांग की है कि इन दोनों नेताओं को अपना दल (एस) के कोटे से मिले सरकारी पदों से तत्काल हटाया जाए। पत्र में कहा गया है कि दोनों नेता न केवल पार्टी से निष्कासित हैं, बल्कि अब वे पार्टी के खिलाफ प्रचार व बयानबाजी भी कर रहे हैं, जो गंभीर अनुशासनहीनता है।

कौन-कौन से पद हैं निशाने पर?

  • चौधरी ब्रजेंद्र सिंह पटेल की पत्नी वर्तमान में अपर शासकीय अधिवक्ता के पद पर कार्यरत हैं।

  • बौद्ध अरविंद पटेल को पूर्वांचल विकास बोर्ड का सदस्य नियुक्त किया गया था।

दोनों को ये पद अपना दल (एस) के कोटे से सत्ता में साझेदारी के तहत दिए गए थे। लेकिन पार्टी से निष्कासन के बावजूद ये पद अब तक इनके पास बने हुए हैं, जिसे लेकर पार्टी में गंभीर नाराजगी है।

पार्टी का आरोप

अपना दल (एस) का कहना है कि ये नेता लगातार संगठन और नेतृत्व के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी कर रहे हैं, जिससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। पार्टी के अनुसार, यह नैतिक और राजनीतिक रूप से अनुचित है कि ऐसे लोग अभी भी सत्ता के लाभ उठा रहे हैं।

भाजपा गठबंधन पर असर?

चूंकि ये सभी पद भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन की सरकार के अंतर्गत आते हैं, ऐसे में अपना दल (एस) की इस मांग को राजनीतिक दबाव के रूप में भी देखा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो यदि मुख्यमंत्री स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होती, तो अपना दल इस मुद्दे को गठबंधन फोरम पर भी उठा सकता है।