मुरादाबाद के अगवानपुर में इंसानियत की मिसाल, अंतिम संस्कार में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से एक ऐसी भावुक और प्रेरणादायक घटना सामने आई है, जिसने समाज में मानवता और सांप्रदायिक सौहार्द की एक नई मिसाल पेश की है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अगवानपुर नगर पंचायत में 76 वर्षीय तेजपाल सिंह के निधन के बाद जो दृश्य सामने आया, उसने सभी को भावुक कर दिया।
जानकारी के अनुसार, तेजपाल सिंह का लंबे समय से स्वास्थ्य खराब चल रहा था। उनके निधन के बाद जब अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई, तो उनके सगे संबंधियों और परिजनों ने किसी कारणवश दूरी बना ली। ऐसे कठिन समय में जब परिवार का साथ न मिलना एक बड़ी पीड़ा बन गया, तब स्थानीय मुस्लिम समुदाय और हिंदू युवाओं ने आगे बढ़कर मानवता का परिचय दिया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जैसे ही इस स्थिति की जानकारी आसपास के मोहल्ले में फैली, अगवानपुर के मुस्लिम समुदाय के लोग और कई हिंदू युवा एकजुट होकर मृतक के घर पहुंचे। उन्होंने न केवल शव को सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार के लिए तैयार करने में मदद की, बल्कि पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम यात्रा भी निकाली।
अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया में स्थानीय लोगों ने मिलकर कंधा दिया, आवश्यक धार्मिक और सामाजिक परंपराओं का सम्मान किया और श्मशान घाट तक अंतिम यात्रा को पूरी गरिमा के साथ पहुंचाया। इस दौरान किसी भी प्रकार का भेदभाव देखने को नहीं मिला, बल्कि केवल इंसानियत और एकजुटता का भाव दिखाई दिया।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह घटना उस गंगा-जमुनी तहजीब का जीवंत उदाहरण है, जिसके लिए उत्तर भारत सदियों से जाना जाता रहा है। आज के समय में जब समाज में कई बार तनाव और विभाजन की खबरें सामने आती हैं, ऐसे में यह घटना एक सकारात्मक संदेश देती है कि इंसानियत आज भी जिंदा है।
मोहल्ले के लोगों ने बताया कि तेजपाल सिंह अपने स्वभाव से शांत और मिलनसार व्यक्ति थे। वे सभी समुदायों के लोगों से समान रूप से मेलजोल रखते थे। शायद यही कारण रहा कि उनके निधन के बाद किसी ने भी उन्हें अकेला नहीं छोड़ा।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर जब लोग एक-दूसरे के साथ खड़े होते हैं, तो समाज में सौहार्द और विश्वास मजबूत होता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से भी अपील की है कि ऐसी घटनाओं को सामाजिक एकता के उदाहरण के रूप में प्रचारित किया जाए, ताकि युवाओं में सकारात्मक सोच विकसित हो सके।