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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच बहराइच की गाजी मियां दरगाह में करोड़ों के गबन का आरोप, सियासत गरमाई

 

उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों की आय और प्रबंधन को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। जहां एक ओर अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर हाल ही में उठे आरोपों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है, वहीं अब बहराइच की प्रसिद्ध गाजी मियां दरगाह में भी करोड़ों रुपये के कथित गबन के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल बढ़ा दी है।

भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बहराइच स्थित गाजी मियां दरगाह में पिछले लगभग 20 वर्षों के दौरान करोड़ों रुपये का गबन किया गया है। उनका कहना है कि दरगाह के चढ़ावे और अन्य धार्मिक आय का सही तरीके से हिसाब-किताब नहीं रखा गया, जिससे बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है।

कुंवर बासित अली ने आरोप लगाया कि दरगाह के प्रबंधन से जुड़े लोगों ने लंबे समय से पारदर्शिता नहीं रखी और धार्मिक दान की राशि का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई की जा सके।

उन्होंने आगे कहा कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं है, बल्कि जनता की आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ मुद्दा भी है। इसलिए इसकी गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है। बासित अली ने इस संबंध में मुख्यमंत्री से भी हस्तक्षेप की मांग करने की बात कही है, ताकि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जा सके।

इस बीच गाजी मियां दरगाह के प्रबंधन की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है और समर्थक तथा विरोधी पक्षों के बीच बयानबाजी भी देखने को मिल रही है।

वहीं दूसरी ओर, अयोध्या राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे के कथित विवाद ने पहले ही राजनीतिक वातावरण को संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में एक ही समय में दो बड़े धार्मिक स्थलों से जुड़े वित्तीय अनियमितता के आरोप सामने आने से प्रदेश की राजनीति में सरगर्मी और बढ़ गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि धार्मिक स्थलों के प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या किसी प्रकार की जांच की घोषणा की जाती है या नहीं।

फिलहाल यह पूरा मामला आरोपों के घेरे में है और इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी।