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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर लगाई रोक, अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित

 

यौन उत्पीड़न के एक मामले में बड़ी राहत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत के इस फैसले के बाद फिलहाल शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक बनी रहेगी, जिससे उनके समर्थकों ने राहत की सांस ली है।

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बताया जा रहा है कि शंकराचार्य की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका पर विस्तृत सुनवाई हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे। बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार और साजिश के तहत दर्ज कराया गया बताया, जबकि अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता पर जोर दिया। सुनवाई के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया।

हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि शंकराचार्य जैसी प्रतिष्ठित संस्था को बदनाम करने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा, “आज हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग अपने ही भाई पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। यह समाज के लिए चिंताजनक स्थिति है।” उन्होंने न्यायपालिका पर विश्वास जताते हुए कहा कि पूरा तंत्र भ्रष्ट नहीं हो सकता। “कहीं न कहीं कोई न कोई ऐसा अवश्य होगा, जिसके मन में न्याय होगा। इसलिए संघर्ष जारी रहना चाहिए,” उन्होंने कहा।

शंकराचार्य ने यह भी दावा किया कि पूरा हिंदू समुदाय इस प्रकरण को लेकर आशंकित था। उनके अनुसार, लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा था कि आखिर उनके गुरु ने ऐसा क्या किया होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा झूठा और मनगढ़ंत है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति की ओर से आरोप लगाए गए हैं, वह कभी आश्रम में रहा ही नहीं। “बटुक कभी आश्रम में नहीं रहे हैं। तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है,” उन्होंने स्पष्ट किया।

इस मामले ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। एक ओर जहां शंकराचार्य के समर्थक इसे साजिश बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत द्वारा अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित रखे जाने से यह स्पष्ट है कि न्यायालय मामले के सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं। यदि अदालत अग्रिम जमानत मंजूर करती है तो शंकराचार्य को बड़ी राहत मिलेगी, जबकि याचिका खारिज होने की स्थिति में कानूनी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक के आदेश ने मामले को नई दिशा दे दी है और आने वाले दिनों में अदालत का फैसला इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।