Allahabad High Court: ‘सर तन से जुदा’ नारा कानून और देश की एकता को चुनौती, तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को बरेली हिंसा मामले में सुनवाई करते हुए ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा’ जैसे नारे को लेकर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि ऐसा नारा देश के कानून, संप्रभुता और अखंडता को खुली चुनौती देता है और लोगों को हिंसा के लिए उकसाने वाला है।
जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की बेंच ने इस मामले में मौलाना तौकीर रजा खान और उनके करीबी डॉ. नफीस खान की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के नारों की तुलना ‘जय श्रीराम’, ‘हर हर महादेव’, ‘सत श्री अकाल’ या ‘अल्लाहु-अकबर’ जैसे धार्मिक उद्घोषों से नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने नारे को बताया हिंसा भड़काने वाला
हाईकोर्ट ने कहा कि धार्मिक नारों का उद्देश्य आस्था और सम्मान व्यक्त करना होता है, जबकि ‘सर तन से जुदा’ जैसे नारे कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले और हिंसा के लिए उकसाने वाले माने जाते हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे नारों से देश की एकता और अखंडता प्रभावित हो सकती है।
बरेली हिंसा मामले से जुड़ा है मामला
मामला 26 सितंबर 2025 को बरेली में हुई हिंसा से जुड़ा है। पुलिस ने इस मामले में मौलाना तौकीर रजा खान को मुख्य आरोपी बताया था। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने पुलिस से टकराव किया, पथराव और हिंसा हुई।
तौकीर रजा 27 सितंबर 2025 से जेल में बंद हैं। पुलिस ने उन्हें हिंसा का मास्टरमाइंड बताया है, जबकि तौकीर रजा का दावा है कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है।
तौकीर रजा के वकील ने दी ये दलील
तौकीर रजा के वकील ने कोर्ट में कहा कि मौलाना निर्दोष हैं और उन्हें राजनीतिक रंजिश के चलते मामले में आरोपी बनाया गया है। बचाव पक्ष ने दलील दी कि उन्होंने कभी हिंसा का आह्वान नहीं किया और घटना के समय वह मौके पर मौजूद भी नहीं थे।
वकील के मुताबिक, 26 सितंबर को ही उन्हें घर में नजरबंद कर दिया गया था। इसलिए हिंसा में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका नहीं हो सकती।
कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलों पर भी विचार किया। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि तौकीर रजा ने लोगों से एकत्र होने की अपील की थी और घटना के बाद उनके रवैये को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
सभी तथ्यों और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने तौकीर रजा और डॉ. नफीस खान की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट के इस फैसले के बाद बरेली हिंसा मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।