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'फॉर्म-7 में जितने नाम सब PDA हैं', अखिलेश यादव ने साधा निशाना, कहा- कयामत तक लड़ेंगे लड़ाई

 

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि फॉर्म-7 के माध्यम से पिछड़ा, दलित और मुस्लिम समुदाय के लोगों के नाम PDA में शामिल किए जा रहे हैं।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट शेयर करते हुए आरोप लगाया कि यह कार्रवाई बड़े पैमाने पर हो रही है और इससे संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं, बल्कि लोकतंत्र के लिए खतरा है। हम इस लड़ाई को कयामत तक लड़ेंगे।”

पूर्व मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से यह दावा किया कि पिछड़ा वर्ग, दलित और मुस्लिम समुदाय के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सरकार पर बड़ा राजनीतिक आरोप लगाते हुए कहा कि यह साजिश केवल चुनावी फायदे के लिए की जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वोटर लिस्ट और फॉर्म-7 जैसे प्रशासनिक दस्तावेजों में गड़बड़ी का आरोप राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा है। उन्होंने बताया कि फॉर्म-7 का उपयोग आमतौर पर वोटर की नामांकन प्रक्रिया या संशोधन के लिए किया जाता है। इस पर विवाद होने पर स्वतंत्र जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अखिलेश यादव का यह बयान आगामी चुनावों से पहले सपा के सक्रिय आंदोलन की ओर इशारा करता है। यह कदम पार्टी को अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के वोटबैंक से जोड़ने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।

वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों ने अभी तक इस आरोप पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि अगर कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक अखिलेश यादव के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय मंचों पर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक चेतावनी है कि लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ किसी भी तरह की मनमानी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस विवाद ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में नई बहस को जन्म दिया है। विपक्षी दलों ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि इस तरह के आरोपों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

अखिलेश यादव ने अंत में कहा, “हम यह लड़ाई तब तक जारी रखेंगे जब तक हर नागरिक का वोट और संवैधानिक अधिकार सुरक्षित नहीं हो जाता। लोकतंत्र में यह हमारी जिम्मेदारी है।”