कानपुर देहात और फतेहपुर में खतरे की घंटी: लोगों के खून में मिला क्रोमियम और मर्करी, स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही उजागर
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक इलाकों में बढ़ते प्रदूषण का असर अब लोगों के खून में भी दिखने लगा है। कानपुर, कानपुर देहात और फतेहपुर में रहने वाले लोगों के रक्त नमूनों की जांच में क्रोमियम और मर्करी जैसे खतरनाक रसायनों की मौजूदगी पाई गई है। ये दोनों तत्व सीधे तौर पर किडनी और लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं, और लंबे समय तक संपर्क में रहने पर अंग विफलता तक का खतरा होता है।
कानपुर की स्थिति चिंताजनक
रिपोर्ट के अनुसार, कानपुर शहर में 328 लोगों के खून में क्रोमियम, जबकि 12 लोगों में मर्करी पाया गया। ये आंकड़े किसी एक इलाके तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे औद्योगिक बेल्ट के आसपास रहने वाले लोगों में यह स्थिति देखी गई है।
कानपुर देहात और फतेहपुर में भी हालात गंभीर
कानपुर देहात में 64 लोगों में क्रोमियम और 5 लोगों में मर्करी की पुष्टि हुई है। वहीं, फतेहपुर में एक महिला के शरीर में मानक से 45 गुना अधिक क्रोमियम पाया गया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उसे इलाज के नाम पर केवल मल्टीविटामिन थमा कर औपचारिकता पूरी कर दी गई।
स्वास्थ्य पर असर और विभाग की उदासीनता
क्रोमियम और मर्करी दोनों ही तत्व शरीर में गंभीर विषाक्त प्रभाव डालते हैं। यह गुर्दों (किडनी), यकृत (लिवर) और यहां तक कि तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक इन तत्वों के संपर्क में रहने से कैंसर जैसी बीमारियों का भी खतरा बढ़ सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इतनी गंभीर जांच रिपोर्ट आने के बावजूद न तो प्रभावित लोगों के लिए समुचित चिकित्सा व्यवस्था की गई और न ही प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर कोई ठोस कार्रवाई शुरू की गई है।
औद्योगिक इकाइयों पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोग और पर्यावरण कार्यकर्ता आरोप लगा रहे हैं कि इस संकट के पीछे क्षेत्र की टैनरी, केमिकल और धातु शोधन इकाइयों की भूमिका हो सकती है, जो बिना उचित ट्रीटमेंट के जहरीला कचरा बाहर निकाल रही हैं।
सरकारी चुप्पी चिंता का विषय
स्वास्थ्य और पर्यावरण विभाग की ओर से अब तक इस मामले पर कोई ठोस बयान नहीं आया है। केवल खानापूर्ति करते हुए सामान्य सलाह दी जा रही है, जबकि यह मामला सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल की तरह लिया जाना चाहिए।