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अखिलेश की रैली दो भाइयों ने कैंसिल कराई, एक सीट पर 14 दावेदार; विधायक बोले- अफसरों को लाठी से कूटेंगे

 

उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी से जुड़े स्थानीय घटनाक्रम इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रस्तावित रैली को लेकर अंदरूनी खींचतान की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि दो भाइयों की वजह से रैली को रद्द करना पड़ा। वहीं, एक विधानसभा सीट पर टिकट के लिए करीब 14 दावेदार सामने आने से पार्टी के भीतर चुनावी तैयारियों और गुटबाजी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

रैली को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, कार्यक्रम की तैयारियां चल रही थीं और पार्टी कार्यकर्ताओं में इसे लेकर उत्साह भी था। हालांकि, अंतिम समय में कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा। इसके पीछे दो भाइयों की भूमिका बताए जाने से स्थानीय राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पार्टी के भीतर इस घटनाक्रम को लेकर नाराजगी की बात भी सामने आ रही है।

एक सीट पर 14 दावेदारों ने बढ़ाई मुश्किल

वहीं, आगामी चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी में टिकट की दावेदारी भी तेज हो गई है। एक विधानसभा सीट पर करीब 14 नेताओं ने अपनी दावेदारी पेश की है। इनमें चर्चित राजनीतिक परिवार से जुड़े एक नेता के रिश्तेदार का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में दावेदार सामने आने के बाद पार्टी नेतृत्व के सामने उम्मीदवार का चयन चुनौती बन सकता है।

टिकट की दावेदारी को लेकर स्थानीय स्तर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रियता बढ़ गई है। हर दावेदार अपने पक्ष में जातीय समीकरण, संगठन में पकड़ और क्षेत्र में जनाधार का दावा कर रहा है। ऐसे में पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी गुटों को साथ रखने की होगी।

चुनावी राजनीति में उम्मीदवार का चयन अक्सर पार्टी के अंदर समीकरणों को प्रभावित करता है। किसी एक नेता को टिकट मिलने के बाद दूसरे दावेदारों की नाराजगी सामने आने का खतरा रहता है। ऐसे में सपा नेतृत्व को उम्मीदवार चुनते समय स्थानीय समीकरणों के साथ संगठन की एकजुटता का भी ध्यान रखना होगा।

विधायक के बयान से भी सियासी माहौल गर्म

इसी बीच एक विधायक के कथित बयान ने भी राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। विधायक ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर करते हुए कथित तौर पर कहा कि जरूरत पड़ने पर अफसरों को लाठी से कूटा जाएगा। इस बयान को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है।

हालांकि, इस तरह के बयान को लेकर यह सवाल भी उठता है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच विवाद की स्थिति में संवैधानिक और कानूनी रास्ते का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अधिकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की शिकायत या कार्रवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया मौजूद है।

चुनाव से पहले बढ़ रही अंदरूनी हलचल

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दलों ने संगठन को मजबूत करने और संभावित उम्मीदवारों की तलाश शुरू कर दी है। सपा भी अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में नेताओं की सक्रियता और संभावित उम्मीदवारों के समीकरण पर नजर रख रही है।

रैली रद्द होने, टिकट के लिए बड़ी संख्या में दावेदार सामने आने और नेताओं के तीखे बयानों से साफ है कि चुनाव से पहले पार्टी के अंदर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि पार्टी नेतृत्व इन मतभेदों को किस तरह संभालता है और संभावित उम्मीदवारों के चयन में किन समीकरणों को प्राथमिकता देता है।