नोएडा एयरपोर्ट का नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ रखने की चर्चा, अखिलेश यादव का तंज—‘जाने वाले निशानियां छोड़ रहे’; जानिए जेवर एयरपोर्ट की कहानी
उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में बन रहे जेवर एयरपोर्ट को लेकर नामकरण की चर्चा ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। एयरपोर्ट का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखे जाने की खबरों के बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज कसा है। उन्होंने टिप्पणी की कि जाने वाले अपनी निशानियां छोड़कर जा रहे हैं। इस बयान के बाद जेवर एयरपोर्ट के नाम और उसके निर्माण से जुड़े राजनीतिक दावों पर बहस शुरू हो गई है।
जेवर एयरपोर्ट को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम से भी जाना जाता है। यह परियोजना पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके शुरू होने से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यात्रियों का दबाव कम करने और क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने की उम्मीद है।
योगी कैबिनेट ने नाम बदलने के प्रस्ताव को दी मंजूरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 9 अक्टूबर को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में जेवर एयरपोर्ट का नाम बदलकर ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा-जेवर’ रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन और शासन से जुड़े योगदान के सम्मान में लिया गया है।
अखिलेश यादव ने क्या कहा?
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने नामकरण के फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि जाने वाले लोग निशानियां छोड़ रहे हैं। उनकी टिप्पणी को प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा सरकार पर राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है।अखिलेश यादव ने जेवर एयरपोर्ट की योजना को समाजवादी पार्टी की सरकार के समय से जोड़ते हुए भाजपा पर विकास परियोजना का श्रेय लेने का आरोप भी लगाया। यह राजनीतिक दावा है; परियोजना की योजना, निर्माण और विभिन्न सरकारों की भूमिका को समझने के लिए उसके अलग-अलग चरणों का रिकॉर्ड देखना जरूरी है।
क्या है जेवर एयरपोर्ट की कहानी?
जेवर एयरपोर्ट गौतमबुद्ध नगर जिले में विकसित किया गया एक बड़ा ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हवाई यातायात की बढ़ती जरूरतों को पूरा करना और दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दबाव कम करने में मदद करना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 नवंबर 2021 को इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। इसके बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ा और 28 मार्च 2026 को एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, जून 2026 में यहां से व्यावसायिक उड़ान सेवाएं भी शुरू हुईं। पहले चरण में एयरपोर्ट पर एक रनवे और यात्री टर्मिनल विकसित किया गया। आगे के चरणों में इसकी क्षमता बढ़ाने की योजना है। एयरपोर्ट से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में कारोबार, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
नाम बदलने के फैसले पर क्यों है चर्चा?
जेवर एयरपोर्ट का नाम बदलने का प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। भाजपा सरकार इसे प्रधानमंत्री के योगदान से जोड़ रही है, जबकि अखिलेश यादव ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं।फिलहाल कैबिनेट ने नामकरण के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके औपचारिक क्रियान्वयन और आधिकारिक दस्तावेजों में नाम बदलने की प्रक्रिया अलग प्रशासनिक चरण हो सकती है। इस फैसले पर आगे भी राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।