राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर सियासी घमासान, अखिलेश यादव और निशिकांत दुबे आमने-सामने; मानहानि नोटिस की तैयारी
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बीच इस मामले को लेकर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
जानकारी के अनुसार, अखिलेश यादव ने मंगलवार दोपहर करीब 1:55 बजे सपा के प्रदेश अध्यक्ष केके पाल के माध्यम से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को मानहानि का कानूनी नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू की है। सपा की ओर से आरोप लगाया गया है कि निशिकांत दुबे के बयान से पार्टी और अखिलेश यादव की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
विवाद की शुरुआत राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले में आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को लेकर हुई टिप्पणियों से हुई। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इस मुद्दे पर बयान दिया था, जिसके बाद सपा ने आपत्ति जताई।
सपा का कहना है कि मामले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और बिना तथ्यों के आरोप लगाए जा रहे हैं। पार्टी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर आरोप है तो उसकी जांच कानून के अनुसार होनी चाहिए, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए किसी दल या नेता को जोड़ना उचित नहीं है।
वहीं, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की ओर से इस मामले में अपने बयान पर रुख स्पष्ट किया गया है। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर अपने आरोपों को दोहराया और इसे गंभीर मामला बताया।
राम मंदिर से जुड़ा कोई भी मामला धार्मिक और भावनात्मक रूप से संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में चढ़ावा चोरी के आरोपी को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है।
फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से बयानबाजी जारी है। सपा की ओर से मानहानि नोटिस भेजे जाने के बाद मामला कानूनी दिशा में भी आगे बढ़ सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि भाजपा सांसद की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है और आगे की कार्रवाई किस दिशा में जाती है।