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IAS दिव्या मित्तल के बाद अब PCS अधिकारी अनुपमा सरोज ने छोड़ी सरकारी नौकरी, राजनीति में उतरने की तैयारी; सपा से चुनाव लड़ने की चर्चा

 

उत्तर प्रदेश में सरकारी सेवा छोड़कर राजनीति में आने वाले अधिकारियों की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद अब यूपी की एक और महिला पीसीएस अधिकारी अनुपमा सरोज सिंह ने सरकारी नौकरी छोड़ने का फैसला किया है। राज्य कर विभाग में डिप्टी कमिश्नर के पद पर तैनात रहीं अनुपमा सरोज का स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) का आवेदन शासन ने मंजूर कर लिया है। उनके इस फैसले के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। चर्चा है कि वह 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा सकती हैं।

अनुपमा सरोज का राजनीतिक परिवार से पुराना संबंध रहा है। उनकी मां सुशीला सरोज समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ नेता रह चुकी हैं और वर्ष 2004 में मोहनलालगंज लोकसभा सीट से सांसद चुनी गई थीं। वहीं, उनके पति अनुराग भदौरिया समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। ऐसे में अनुपमा के सरकारी सेवा छोड़कर सार्वजनिक जीवन में आने के फैसले को राजनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

31 अक्टूबर से मिली स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति

अनुपमा सरोज सिंह राज्य कर विभाग में डिप्टी कमिश्नर के पद पर कार्यरत थीं। उन्होंने इसी साल 11 जून को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था। राज्य कर मुख्यालय की ओर से उनका प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इसके बाद शासन ने 28 अक्टूबर को जारी आदेश में उनका वीआरएस मंजूर कर लिया। उन्हें 31 अक्टूबर 2026 से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति प्रदान की गई है।

अनुपमा ने सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश साझा कर प्रशासनिक सेवा से सार्वजनिक जीवन की ओर कदम बढ़ाने की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा में रहते हुए उन्हें लोगों की समस्याओं को करीब से समझने और उनके समाधान के लिए काम करने का अवसर मिला। हालांकि, व्यवस्था के भीतर काम करने की अपनी कुछ सीमाएं होती हैं। अब वह बदलाव की प्रक्रिया में स्वयं भागीदार बनना चाहती हैं।

सिधौली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा

अनुपमा सरोज के वीआरएस लेने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह सीतापुर जिले की सिधौली विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ सकती हैं। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।

हालांकि, अभी तक अनुपमा सरोज या समाजवादी पार्टी की ओर से उनके चुनाव लड़ने अथवा पार्टी में औपचारिक रूप से शामिल होने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए इसे फिलहाल राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।

मां सांसद और पति सपा के प्रवक्ता

अनुपमा सरोज का परिवार राजनीति और प्रशासन दोनों क्षेत्रों से जुड़ा रहा है। उनकी मां सुशीला सरोज वर्ष 2004 में मोहनलालगंज लोकसभा सीट से सांसद बनी थीं। वह समाजवादी पार्टी की राजनीति में सक्रिय रही हैं। उनके पति अनुराग भदौरिया भी सपा के प्रमुख प्रवक्ताओं में शामिल हैं। अनुराग भदौरिया लखनऊ पूर्व विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ चुके हैं।

अनुपमा की अपनी पहचान प्रशासनिक अधिकारी के अलावा पार्श्व गायिका के रूप में भी रही है। उन्हें संगीत और फिल्म इंडस्ट्री में अनुपमा राग के नाम से जाना जाता है।

महिलाओं की राजनीति में भागीदारी पर दिया जोर

अपने वीडियो संदेश में अनुपमा ने महिलाओं की राजनीति और नीति निर्माण में भागीदारी को जरूरी बताया। उनका कहना है कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से समाज को अधिक संवेदनशील और बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

गौरतलब है कि इससे पहले पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल भी सरकारी सेवा छोड़कर राजनीति में आने का ऐलान कर चुकी हैं। उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी जननीति भारत पार्टी बनाई है। अब अनुपमा सरोज के फैसले ने भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू कर दी हैं।

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