95 साल की दादी की अनोखी कांवड़ यात्रा, 35 पोते बारी-बारी उठाकर ले जा रहे पालकी; हरिद्वार से गांव लौट रहीं सोन देवी
कांवड़ यात्रा के दौरान हापुड़ में आस्था और परिवार के अनोखे समर्पण की तस्वीर देखने को मिली। 95 साल की सोन देवी पालकी में बैठकर हरिद्वार से अपने गांव की ओर लौट रही हैं। खास बात यह है कि उनकी पालकी को परिवार के करीब 35 पोते बारी-बारी से अपने कंधों पर उठाकर चल रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर सोन देवी की कांवड़ यात्रा लोगों के लिए श्रद्धा और पारिवारिक प्रेम की मिसाल बन गई है।
सोन देवी बुलंदशहर के हसनपुर जागीर गांव की रहने वाली हैं। उनकी लंबे समय से इच्छा थी कि वह हरिद्वार जाकर मां गंगा के दर्शन करें, गंगा स्नान करें और कांवड़ यात्रा का हिस्सा बनें। लेकिन 95 वर्ष की उम्र में उनके लिए लंबी दूरी तक पैदल चलना संभव नहीं था। इसके बावजूद परिवार ने उनकी इच्छा को अधूरा नहीं रहने दिया।
दादी की इच्छा पूरी करने के लिए निकले पोते
सोन देवी के पोतों ने मिलकर उन्हें पालकी में हरिद्वार ले जाने का फैसला किया। परिवार के करीब 35 पोते बारी-बारी से पालकी को कंधा दे रहे हैं। कोई कुछ दूरी तक पालकी उठाता है तो उसके बाद दूसरा पोता जिम्मेदारी संभाल लेता है। इस तरह परिवार के सदस्य मिलकर अपनी दादी को कांवड़ यात्रा का हिस्सा बना रहे हैं।
परिवार के इस प्रयास ने कांवड़ यात्रा के दौरान लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। रास्ते से गुजर रहे श्रद्धालु भी 95 वर्षीय महिला को पालकी में देखकर रुक रहे हैं और उनके परिवार की भावना की सराहना कर रहे हैं।
हरिद्वार जाकर किया गंगा स्नान
सोन देवी की इच्छा थी कि वह हरिद्वार पहुंचकर मां गंगा में स्नान करें। परिवार ने उनकी यह इच्छा पूरी की और उन्हें हरिद्वार ले गया। वहां गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठान के बाद अब वह पालकी में बैठकर अपने गांव की ओर लौट रही हैं।
परिवार का कहना है कि सोन देवी के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी नहीं है, बल्कि उनकी वर्षों पुरानी इच्छा को पूरा करने का मौका भी है। उम्र अधिक होने के कारण वह खुद पैदल नहीं चल सकती थीं, इसलिए पोतों ने उनके लिए पालकी की व्यवस्था की।
दादी-पोतों के रिश्ते की मिसाल
कांवड़ यात्रा के बीच सामने आई सोन देवी की यह कहानी लोगों को भावुक कर रही है। 95 साल की दादी की इच्छा पूरी करने के लिए करीब 35 पोतों का एकजुट होकर जिम्मेदारी उठाना परिवार के मजबूत रिश्ते और बुजुर्गों के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
हरिद्वार से हापुड़ और फिर बुलंदशहर के हसनपुर जागीर गांव तक की यात्रा में सोन देवी अपने पोतों के कंधों पर सफर कर रही हैं। कांवड़ यात्रा के बीच उनकी यह अनोखी यात्रा श्रद्धा, परिवार और बुजुर्गों के प्रति सम्मान की ऐसी तस्वीर पेश कर रही है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।