यूपी के गांवों में कमाई का नया रास्ता: FPO के जरिए शुरू हुई गोमूत्र की खरीद, सफल रहा पायलट तो पूरे प्रदेश में होगा विस्तार
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में किसानों और पशुपालकों के लिए अतिरिक्त कमाई का नया रास्ता खुलने की तैयारी है। प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से गोमूत्र की खरीद शुरू की गई है। सरकार की योजना है कि इस पहल के जरिए पशुपालकों को गोमूत्र से भी आय का अवसर मिले और गांवों में पशुपालन को आर्थिक रूप से अधिक उपयोगी बनाया जा सके।
फिलहाल इस योजना को सीमित स्तर पर शुरू किया गया है। पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। यदि प्रयोग सफल रहता है तो गोमूत्र खरीद की व्यवस्था को प्रदेश के अन्य जिलों और गांवों तक विस्तार देने की योजना है।
FPO के जरिए होगी खरीद
इस पहल में किसान उत्पादक संगठनों को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। FPO किसानों और पशुपालकों को एक मंच पर लाकर उनके उत्पादों की खरीद-बिक्री और बाजार से जोड़ने का काम करते हैं। इसी व्यवस्था का इस्तेमाल गोमूत्र की खरीद के लिए किया जा रहा है।
इससे पशुपालकों को अपने पशुओं से मिलने वाले गोमूत्र को बेचने का अवसर मिलेगा। अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में गोमूत्र को ज्यादातर पारंपरिक और धार्मिक उपयोग से ही जोड़ा जाता रहा है। खरीद की व्यवस्थित व्यवस्था बनने पर इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
पशुपालकों को मिलेगा अतिरिक्त आय का जरिया
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा छोटे और सीमांत पशुपालकों को मिलने की उम्मीद है। पशुपालन करने वाले परिवारों को दूध के अलावा अन्य उत्पादों से भी कमाई का अवसर मिल सकता है।
सरकार की कोशिश है कि गांवों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जाए और किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित किए जाएं। गोमूत्र की खरीद इसी दिशा में एक प्रयोग के तौर पर देखी जा रही है।
पायलट प्रोजेक्ट के बाद होगा फैसला
अभी इसे पूरे प्रदेश में लागू नहीं किया गया है। पहले पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसकी व्यवहारिकता, खरीद व्यवस्था, गुणवत्ता, संग्रहण और बाजार की मांग जैसे पहलुओं का आकलन किया जाएगा।
यदि शुरुआती चरण में योजना से अपेक्षित परिणाम मिलते हैं तो इसे व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी की जा सकती है। इसके लिए FPO का नेटवर्क और मजबूत किया जा सकता है, ताकि गांव-गांव से गोमूत्र की खरीद और उसे संबंधित उद्योगों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित हो सके।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश
उत्तर प्रदेश में कृषि के साथ पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में सरकार की ओर से आय के नए स्रोत तलाशने पर जोर दिया जा रहा है। गोमूत्र की खरीद का यह प्रयोग इसी सोच का हिस्सा है।
हालांकि योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि खरीद की कीमत क्या तय होती है, बाजार कितना विकसित होता है और पशुपालकों को इससे नियमित आय कितनी मिल पाती है। फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों का इंतजार है। सफल होने पर यह पहल प्रदेश के गांवों में पशुपालकों के लिए कमाई का एक नया माध्यम बन सकती है।