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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ नाबालिगों के यौन शोषण का मामला दर्ज, वीडियो में देखें पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर FIR

 

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में शंकराचार्य के शिष्य मुकुंदानंद को भी नामजद किया गया है, जबकि 2 से 3 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।

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झूंसी थाना प्रभारी महेश मिश्रा ने बताया कि अदालत के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों और आरोपों की गंभीरता से जांच की जाएगी और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, यह पूरा मामला जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज द्वारा दायर की गई याचिका के बाद सामने आया। आशुतोष ब्रह्मचारी ने प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कोर्ट के सामने दो नाबालिग बच्चों को पेश भी किया था।

सूत्रों के मुताबिक, अदालत में दोनों बच्चों के बयान कैमरे के सामने दर्ज किए गए। बच्चों ने अपने साथ हुए कथित उत्पीड़न के बारे में न्यायालय के समक्ष जानकारी दी। इस दौरान अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी पक्षों की बात सुनी।

बताया जा रहा है कि कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद 13 फरवरी को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद शनिवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। कोर्ट के आदेश के बाद ही झूंसी थाने में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों में जांच बेहद संवेदनशील तरीके से की जाती है। नाबालिगों की पहचान गोपनीय रखी जा रही है और उनके अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

इस घटना के सामने आने के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और संबंधित लोगों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस मामले ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और संवेदनशील मामलों में न्याय प्रक्रिया की अहमियत को रेखांकित किया है।