फीस नहीं देने पर 77 वर्षीय अधिवक्ता ने फर्म के खिलाफ दायर किया वाद, काम कराने के बाद भुगतान नहीं करने का आरोप
एक 77 वर्षीय अधिवक्ता ने अपनी पेशेवर फीस का भुगतान नहीं किए जाने पर ख्यालीराम कन्हैयालाल एंड संस फर्म के खिलाफ वाद दायर किया है। अधिवक्ता का आरोप है कि फर्म के प्रोप्राइटर ने वाणिज्यकर विभाग में लंबित मामलों के निस्तारण के लिए उन्हें नियुक्त किया था, लेकिन काम पूरा होने के बाद तय फीस का भुगतान नहीं किया गया।
वाद के अनुसार, प्रतिवादी फर्म ख्यालीराम कन्हैयालाल एंड संस के प्रोप्राइटर ने अपनी फर्म से जुड़े वाणिज्यकर विभाग के लंबित मामलों की पैरवी और निस्तारण के लिए 77 वर्षीय अधिवक्ता को जिम्मेदारी सौंपी थी। अधिवक्ता ने नियुक्ति के बाद संबंधित मामलों में काम किया और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में अपनी सेवाएं दीं।
काम पूरा होने के बाद फीस नहीं देने का आरोप
अधिवक्ता का कहना है कि फर्म की ओर से उन्हें काम सौंपा गया था और उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाई। हालांकि, काम पूरा होने के बाद भी उन्हें उनकी पेशेवर फीस नहीं दी गई। भुगतान के लिए प्रयास किए जाने के बावजूद राशि नहीं मिलने पर उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाया और वाद दायर किया।
इस मामले में अब संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के तहत सुनवाई होगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में बकाया फीस की कुल राशि, वाद दायर किए जाने की तारीख और अदालत की ओर से हुई कार्रवाई का विवरण सामने नहीं आया है।
यह मामला पेशेवर सेवाएं लेने के बाद भुगतान नहीं किए जाने से जुड़ा है। अधिवक्ता ने अपने दावे के जरिए बकाया फीस दिलाने की मांग की है। प्रतिवादी फर्म का पक्ष और मामले में आगे होने वाली न्यायिक कार्रवाई के बाद ही विवाद की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।