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काशी में रोपवे का 96% काम पूरा, दिसंबर से शुरू हो सकती है सेवा; 10 रुपये से शुरू होगा किराया, 16 मिनट में कैंट से गोदौलिया पहुंचेंगे

 

वाराणसी में देश की पहली शहरी सार्वजनिक परिवहन रोपवे परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। काशी में रोपवे का करीब 96 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। अधिकारियों के मुताबिक, दिसंबर 2026 में यात्रियों के लिए सेवा शुरू करने की तैयारी है। रोपवे शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं और पर्यटकों को कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक पहुंचने के लिए शहर के जाम से जूझना नहीं पड़ेगा। यह सफर करीब 15 से 16 मिनट में पूरा हो सकेगा।

जमीन से काफी ऊंचाई पर चलेंगे गंडोले

रोपवे का कॉरिडोर करीब 3.85 किलोमीटर लंबा है। इसके रास्ते में पांच स्टेशन और 29 टावर बनाए गए हैं। गंडोले जमीन से अधिकतम करीब 152 फीट की ऊंचाई तक चलेंगे। इनमें एक साथ 10 यात्री सफर कर सकेंगे। आधुनिक गोंडोला सिस्टम के जरिए यात्रियों को काशी का आसमान से नजारा देखने का मौका मिलेगा।

कैंट से गोदौलिया तक 50 रुपये किराया

रोपवे का किराया दूरी के हिसाब से तय किया गया है। अलग-अलग स्टेशनों के बीच न्यूनतम किराया 10 रुपये से शुरू होगा, जबकि कैंट से गोदौलिया तक पूरी यात्रा के लिए 50 रुपये देने होंगे। काशी स्मार्ट पास या नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड से भुगतान करने वाले यात्रियों को 20 प्रतिशत तक छूट मिलेगी।

मेट्रो जैसी सुविधाओं से लैस होंगे स्टेशन

रोपवे स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा के लिए लिफ्ट, एस्केलेटर, टिकट काउंटर, टिकट वेंडिंग मशीन और डिजिटल टिकटिंग की व्यवस्था की गई है। यात्री क्यूआर कोड के जरिए भी टिकट ले सकेंगे। बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों के लिए भी विशेष सुविधाएं रखी गई हैं। कैंट रेलवे स्टेशन से रोपवे स्टेशन तक सीधी कनेक्टिविटी देने की तैयारी है, जिससे ट्रेन से आने वाले यात्रियों को सुविधा मिलेगी।

सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक

रोपवे में सुरक्षा को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। तेज हवा की स्थिति में सिस्टम अपने आप रुक जाएगा। बिजली आपूर्ति बाधित होने या तकनीकी खराबी आने पर बैकअप व्यवस्था के जरिए गंडोलों को नजदीकी स्टेशन तक पहुंचाया जा सकेगा। प्रत्येक गंडोले और टावर की निगरानी कंट्रोल रूम से की जाएगी।

काशी के यातायात को मिलेगी राहत

रोपवे का रूट कैंट रेलवे स्टेशन से शुरू होकर काशी विद्यापीठ, रथयात्रा और गिरजाघर होते हुए गोदौलिया तक पहुंचेगा। यहां से काशी विश्वनाथ मंदिर की दूरी करीब 700 मीटर है। परियोजना शुरू होने से स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर त्योहारों और सावन जैसे अवसरों पर शहर के व्यस्त इलाकों में आवागमन का एक नया विकल्प उपलब्ध होगा।