गंगा कटान से स्कूल का 90 फीसदी हिस्सा नदी में समाया, बदायूं में 200 बीघा जमीन जलमग्न; बढ़ाई गई निगरानी
बदायूं में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज कटान ने ग्रामीण इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। गंगा कटान की चपेट में आने से एक स्कूल का करीब 90 फीसदी हिस्सा नदी में समा गया। वहीं आसपास के क्षेत्र में करीब 200 बीघा कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है और प्रभावित इलाकों में अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
गंगा में लगातार बढ़ते पानी के कारण नदी किनारे बसे गांवों में कटान का खतरा बढ़ गया है। नदी की तेज धार से किनारे की जमीन लगातार कट रही है। इसी कटान की चपेट में स्कूल का बड़ा हिस्सा आ गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, स्कूल की इमारत का अधिकांश भाग नदी में समा चुका है।
90 फीसदी स्कूल नदी में समाया
गंगा के तेज कटान से स्कूल भवन को भारी नुकसान पहुंचा है। बताया जा रहा है कि स्कूल का करीब 90 फीसदी हिस्सा नदी की धारा में समा गया है। इससे बच्चों की पढ़ाई को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
स्कूल के आसपास का क्षेत्र लगातार कटान की चपेट में है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। यदि जलस्तर और बढ़ता है तो आसपास के अन्य क्षेत्रों में भी नुकसान की आशंका बनी हुई है।
200 बीघा जमीन जलमग्न
गंगा के बढ़े जलस्तर का असर खेती पर भी पड़ा है। क्षेत्र में करीब 200 बीघा कृषि भूमि पानी में डूब गई है। खेतों में पानी भरने से किसानों को फसलों के नुकसान की चिंता सताने लगी है।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी का पानी बढ़ने के साथ कटान भी तेज हो रहा है। इससे नदी किनारे की जमीन असुरक्षित होती जा रही है। किसानों और ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने की मांग की है।
गंगा में छोड़ा गया 1,15,137 क्यूसेक पानी
जानकारी के अनुसार, गंगा में 1,15,137 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। पानी की इस मात्रा के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने और किनारे के इलाकों में दबाव बढ़ने की स्थिति बनी हुई है।
प्रशासन ने नदी के जलस्तर और कटान की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को सक्रिय किया है। संवेदनशील इलाकों में स्थिति का जायजा लिया जा रहा है।
ग्रामीणों में बढ़ी चिंता
गंगा किनारे रहने वाले ग्रामीणों में लगातार बढ़ते जलस्तर को लेकर चिंता है। लोगों को नदी के आसपास जाने से बचने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है। संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए है।
स्कूल के बड़े हिस्से के नदी में समाने और 200 बीघा जमीन जलमग्न होने के बाद प्रशासन के सामने ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ-साथ प्रभावित किसानों और विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की चुनौती भी है। फिलहाल गंगा के जलस्तर और कटान पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।