जौनपुर में दहेज हत्या मामले में पति समेत 5 दोषी, सभी को 7-7 साल की सजा; गवाह मुकरने के बाद भी कोर्ट ने सुनाया फैसला
उत्तर प्रदेश के जौनपुर में अपर सत्र न्यायाधीश प्रशांत कुमार सिंह की अदालत ने दहेज हत्या के एक मामले में पति समेत पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए सात-सात साल के कारावास की सजा सुनाई है। खास बात यह रही कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान मामले के सभी गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए थे। इसके बावजूद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य तथ्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी माना।
अदालत के फैसले के बाद दहेज हत्या के मामलों में गवाहों के मुकर जाने के बावजूद साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक निर्णय की चर्चा हो रही है।
दहेज हत्या का था मामला
मामला विवाहिता की मौत से जुड़ा था। अभियोजन पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया था कि विवाह के बाद महिला को दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया। बाद में उसकी मौत हो गई, जिसके बाद मायके पक्ष की शिकायत पर पति सहित अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। इसके बाद न्यायालय में मामले की सुनवाई शुरू हुई।
सुनवाई के दौरान गवाह मुकर गए
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। ऐसे मामलों में गवाहों के बयान बदलने से अभियोजन पक्ष के सामने बड़ी चुनौती पैदा हो जाती है।
हालांकि अदालत ने केवल गवाहों के बयानों पर निर्भर रहने के बजाय मामले में उपलब्ध अन्य साक्ष्यों और परिस्थितियों का भी परीक्षण किया। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपी दोषी हैं।
पांच आरोपियों को 7-7 साल की सजा
अदालत ने मामले में पति समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहराया। सभी दोषियों को सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई। न्यायालय के फैसले के बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की गई।
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना और गवाहों के मुकरने के बावजूद आरोपियों की भूमिका को साक्ष्यों के आधार पर परखा।
साक्ष्यों के आधार पर आया फैसला
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान बदलने के बावजूद अदालत ने केस में मौजूद अन्य साक्ष्यों को नजरअंदाज नहीं किया। न्यायालय ने पूरे मामले की परिस्थितियों और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद फैसला सुनाया।