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2 KG गोल्ड, कीमत 3 करोड़… वाराणसी में सोने की सबसे बड़ी चोरी, 5 दोस्तों का प्लान जान दिमाग चकरा जाएगा

 

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सोना चोरी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पांच लोगों पर ₹3 करोड़ (लगभग $30 मिलियन USD) का सोना चोरी करने का आरोप है। हालांकि, एक गलती ने पुलिस का काम आसान कर दिया। आरोपियों ने प्लान के मुताबिक वारदात को अंजाम दिया। मुख्य आरोपी ने एक बिजनेसमैन के घर के नौकर से दोस्ती करके उसके घर से सोना चुराया और फिर उसे शराब की लत लगा दी। चोरी के बाद आरोपी भाग गए, लेकिन पुलिस ने एक आरोपी की पहचान कर सभी को गिरफ्तार कर लिया और चोरी का सोना जब्त कर लिया।

वाराणसी में, वाराणसी पुलिस ने चौक थाना क्षेत्र के कर्णघंटा से पांच लोगों को गिरफ्तार किया और दो किलोग्राम से ज़्यादा सोना जब्त किया। जब्त सोने की कीमत ₹3 करोड़ (लगभग $30 मिलियन USD) से ज़्यादा आंकी गई है। यह वाराणसी में अब तक की सबसे बड़ी सोने की चोरी है। लूट की प्लानिंग तीन महीने पहले की गई थी। इस प्लान का मास्टरमाइंड गाज़ीपुर का विकास बेनवंशी बताया जा रहा है। इसमें विकास बेनवंशी, जौनपुर का दीपेश चौहान और गाज़ीपुर का शुभम विश्वकर्मा शामिल थे। लेकिन चोरी में केयरटेकर तारक घोराई का शामिल होना ज़रूरी था। विकास ने तारक घोराई से दोस्ती की और उसे फंसाने के लिए शराब की लत लगा दी।

तारक घोराई ने अपने मालिक को धोखा दिया
पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर का रहने वाला तारक घोराई पिछले कुछ सालों से सोने की ज्वेलरी के बिज़नेस से जुड़ा था। बनारस का एक होलसेलर, जो मुंबई में रहता था और बनारस में सोने की ज्वेलरी का बिज़नेस चलाता था, उसने छह महीने पहले तारक को अपने बिज़नेस में शामिल किया था। तारक कर्णघंटा वाले घर की देखभाल कर रहा था, जहाँ मुंबई समेत कई जगहों से सामान आता था और फिर रिटेल सोने के व्यापारियों को बेचा जाता था। तारक यह सारा काम देखता था।

विकास ने पहले तारक से दोस्ती की, फिर शुभम के ज़रिए आजमगढ़ में अड्डा बनाया, जहाँ तारक शराब और ड्रग्स दोनों का आदी हो गया। जब तारक दोनों का आदी हो गया, तो विकास और दीपेश ने अपना प्लान उसके साथ शेयर किया। तारक खुद भी बहुत सारा पैसा कमाना चाहता था। वह विकास के प्लान के लिए मान गया, और इस तरह लूट की प्लानिंग हुई। इस लूट में गाज़ीपुर का सैनुद्दीन अंसारी भी शामिल था।

बनारस की सबसे बड़ी सोने की चोरी

प्लान के मुताबिक, सबकी ज़िम्मेदारियां बांटी गईं। दीपेश का काम डुप्लीकेट चाबी बनाना था। सैनुद्दीन अंसारी अंदर जाता, और शुभम तारक को आजमगढ़ ले जाता। सबके मोबाइल फोन आजमगढ़ में ही रहते ताकि पकड़े भी जाएं तो CDR या मोबाइल लोकेशन से कोई जानकारी न मिल सके। आरोपियों ने यह चोरी 5 जनवरी को की थी। 6 जनवरी को केस दर्ज किया गया था। ACP दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी के नेतृत्व में तीन टीमें बनाई गईं: SOG, सर्विलांस और चौक पुलिस।