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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में प्रायश्चित अनुष्ठान शुरू, फुटेज में देंखे 18 पुजारी और 5 आचार्य कर रहे पूजा; गोपाल राव ने छोड़ी अयोध्या

 

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद शुक्रवार सुबह 11 बजे से मंदिर परिसर में प्रायश्चित अनुष्ठान शुरू किया गया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से भगवान श्रीराम से क्षमा-याचना और मंदिर की पवित्रता की पुनर्स्थापना के लिए विशेष पूजा-पाठ कराया जा रहा है।

इस धार्मिक अनुष्ठान में 18 पुजारी और 5 आचार्य शामिल हैं। वे विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना, वेद मंत्रों का उच्चारण, रुद्राभिषेक और हवन कर रहे हैं। ट्रस्ट का मानना है कि व्यवस्था में हुई चूक के कारण यह घटना हुई, जिससे देश-विदेश के श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है।

10 दिन तक चलेगा विशेष अनुष्ठान

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सूत्रों के मुताबिक, वैदिक परंपराओं के अनुसार मंदिर की पवित्रता बनाए रखने और घटना के लिए प्रायश्चित के उद्देश्य से यह अनुष्ठान कराया जा रहा है। यह विशेष पूजा 10 दिनों तक चलेगी।इस दौरान पुजारी प्रतिदिन दो बार भगवान विष्णु के विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करेंगे। इसके साथ ही नियमित रूप से हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी प्रकार की अशुद्धि या व्यवधान के बाद प्रायश्चित पूजा के जरिए मंदिर की पवित्रता को पुनर्स्थापित करने की परंपरा रही है।

ट्रस्ट ने मानी व्यवस्था में चूक

सूत्रों के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी मानते हैं कि चढ़ावा चोरी की घटना सुरक्षा और व्यवस्था में हुई कमी के कारण हुई। इस घटना के बाद मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे।ट्रस्ट की ओर से अब व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

गोपाल राव ने छोड़ी अयोध्या

इस बीच, राम मंदिर निर्माण के प्रभारी रहे गोपाल राव के अयोध्या छोड़ने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने उनका कार्यक्षेत्र बदल दिया है।हालांकि, गोपाल राव को अब किस स्थान पर भेजा गया है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। गोपाल राव मंदिर निर्माण से जुड़े प्रमुख अधिकारियों में शामिल थे।बताया जा रहा है कि 6 जुलाई को हुई मंदिर निर्माण समिति की बैठक के बाद उन्हें जिम्मेदारी से हटा दिया गया था।

सुरक्षा व्यवस्था पर बढ़ा फोकस

चढ़ावा चोरी की घटना के बाद मंदिर प्रशासन अब सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ज्यादा सतर्क हो गया है। मंदिर परिसर में निगरानी व्यवस्था, कर्मचारियों की जिम्मेदारी और प्रबंधन प्रणाली की समीक्षा की जा रही है। वहीं, प्रायश्चित अनुष्ठान के जरिए मंदिर की धार्मिक परंपराओं के अनुसार क्षमा याचना की जा रही है। ट्रस्ट का प्रयास है कि श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास को बनाए रखा जाए।