मोबाइल न मिलने से नाराज 14 वर्षीय छात्रा ने फांसी लगाकर जीवन समाप्त किया
डिजिटल युग की बढ़ती सनक अब मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ने लगी है। जिले के एक छोटे से घर में कक्षा 7 की छात्रा प्राची ने महज मोबाइल न मिलने के कारण ऐसा कदम उठा लिया कि पूरे परिवार का संसार ही उजाड़ गया।
घटना के अनुसार, बड़ी बहन ने प्राची को मोबाइल देने से मना किया। इससे नाराज होकर 14 वर्षीय प्राची ने कमरे के अंदर फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। पड़ोसियों और परिवार वालों ने इस घटना के बाद घंटों तक चीख-पुकार और हड़कंप मचा देखा।
प्राची की मौत ने न केवल उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि समाज के सामने भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों और किशोरों में डिजिटल डिवाइस और सोशल मीडिया के प्रति अत्यधिक आसक्ति उन्हें मानसिक रूप से कमजोर और असुरक्षित बना सकती है।
मनोवैज्ञानिकों ने बताया कि किशोरों की उम्र में भावनात्मक अस्थिरता और सामाजिक दबाव अधिक होता है। इस अवस्था में छोटे से विवाद, जैसे मोबाइल न मिलने पर निराशा, कभी-कभी घातक परिणाम तक ले जा सकती है। उन्होंने कहा कि माता-पिता और परिवार को बच्चों की भावनात्मक जरूरतों और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
स्थानीय पुलिस ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ है कि हत्या या अन्य बाहरी हस्तक्षेप नहीं था, और यह आत्महत्या का मामला प्रतीत होता है। पुलिस ने परिवार को इस दुख की घड़ी में सांत्वना देते हुए आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
समाजशास्त्रियों का कहना है कि यह घटना डिजिटल युग में बच्चों पर बढ़ते दबाव और तकनीक के अनुचित उपयोग की गंभीर चेतावनी है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूलों और घरों में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, Counselling और माता-पिता की शिक्षा आवश्यक हो गई है।
अभिभावकों और समाज के लिए यह घटना सोचने और जागरूक होने की चेतावनी है। बच्चों की खुशियों और भावनाओं को समझना, उनके साथ संवाद करना और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराना अब समय की मांग बन गया है।
इस प्रकार, महोबा में हुई यह दुखद घटना केवल एक परिवार का नहीं बल्कि पूरे समाज का चेतावनी संकेत है कि बच्चों की मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया तो परिणाम अत्यंत दर्दनाक हो सकते हैं।