यूपी में आयुष्मान योजना के पैनल से जुड़े 140 अस्पतालों को नोटिस, मानकों की प्रक्रिया पूरी न करने पर शासन सख्त
उत्तर प्रदेश सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत पैनल में शामिल अस्पतालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रदेश के करीब 140 अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है, क्योंकि उन्होंने निर्धारित मानकों और जरूरी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा नहीं किया। शासन की इस सख्ती के बाद स्वास्थ्य विभाग और निजी अस्पतालों में हड़कंप मच गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत मरीजों को बेहतर और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अस्पतालों को कई तकनीकी और प्रशासनिक मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है। इनमें अस्पताल की आधारभूत सुविधाएं, प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ, आवश्यक उपकरण, मरीजों का डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन सत्यापन प्रक्रिया जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। लेकिन हालिया समीक्षा में कई अस्पताल इन मानकों पर खरे नहीं उतरे।
जांच में सामने आया कि कुछ अस्पतालों ने आवश्यक दस्तावेज समय पर जमा नहीं किए, जबकि कई जगहों पर सुविधाएं अधूरी पाई गईं। कुछ अस्पतालों में मरीजों के रिकॉर्ड अपडेट नहीं मिले और कहीं-कहीं इलाज की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे। इसके बाद शासन ने संबंधित अस्पतालों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि तय समय सीमा के भीतर अस्पताल अपनी कमियां दूर नहीं करते हैं तो उन्हें आयुष्मान योजना के पैनल से हटाया जा सकता है। ऐसा होने पर उन अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड धारकों का मुफ्त इलाज बंद हो जाएगा। शासन का कहना है कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि आयुष्मान योजना केंद्र और राज्य सरकार की सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि अस्पताल तय नियमों का पालन नहीं करेंगे तो मरीजों को परेशानी उठानी पड़ सकती है।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को भी निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। आने वाले दिनों में अस्पतालों का दोबारा निरीक्षण किया जाएगा। जिन संस्थानों में सुधार नहीं मिलेगा, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
इस कार्रवाई के बाद कई अस्पतालों ने अपनी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना शुरू कर दिया है। अस्पताल संचालकों का कहना है कि कुछ तकनीकी कारणों से प्रक्रियाएं लंबित थीं, जिन्हें जल्द पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि शासन इस बार किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नजर नहीं आ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की इस सख्ती से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। वहीं आम लोगों का कहना है कि आयुष्मान जैसी बड़ी योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है ताकि गरीब मरीजों को समय पर और सही इलाज मिल सके।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई ने प्रदेश के निजी अस्पतालों को सतर्क कर दिया है। आने वाले दिनों में और भी अस्पतालों की जांच होने की संभावना जताई जा रही है।