जासूसी के लिए दुबई भेजे गए थे 12 भारतीय सिम कार्ड, जूतों में छिपाकर कोरियर से भेजी गई थी खेप
जासूसी से जुड़े एक मामले में बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, जासूसी गतिविधियों के लिए 12 भारतीय सिम कार्ड दुबई भेजे गए थे। इन सिम कार्ड को कौशांबी से जूतों के अंदर छिपाकर कोरियर के जरिए दुबई भेजा गया था। इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
जांच के दौरान सामने आया कि राज और शिवा वाल्मीकि ने कथित तौर पर भारतीय सिम कार्ड को विदेश भेजने की साजिश रची थी। दोनों ने कौशांबी स्थित एक कोरियर के जरिए 12 भारतीय सिम कार्ड दुबई भेजे। जांच एजेंसी के मुताबिक, सिम कार्ड को सामान्य सामान की तरह दिखाने के लिए उन्हें जूतों के अंदर छिपाया गया था। इसके बाद कोरियर के माध्यम से यह खेप दुबई भेजी गई।
जूतों में छिपाकर भेजे गए थे सिम कार्ड
जांच में यह बात सामने आई कि आरोपियों ने सिम कार्ड की पहचान छिपाने के लिए उन्हें जूतों के अंदर रखा था। इसके बाद इन्हें कौशांबी के कोरियर के जरिए दुबई भेजा गया। एजेंसी अब इस बात की जांच कर रही है कि इन सिम कार्ड का इस्तेमाल किन लोगों ने किया और इनके जरिए किस तरह की गतिविधियों को अंजाम दिया गया।
मामले की जांच के दौरान एजेंसियों को कथित तौर पर ऐसे साक्ष्य मिले, जिनसे आरोपियों के बीच संपर्क और सिम कार्ड को दुबई भेजने की पूरी प्रक्रिया का पता चला। जांच एजेंसी ने मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं को अपनी चार्जशीट में शामिल किया है।
13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में कुल 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसमें जासूसी नेटवर्क से कथित तौर पर जुड़े लोगों की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि भारतीय सिम कार्ड विदेश भेजने के पीछे किस तरह का नेटवर्क काम कर रहा था और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था।
मामले में राज और शिवा वाल्मीकि की भूमिका भी जांच के दायरे में रही है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने सिम कार्ड को जूतों में छिपाकर कोरियर के माध्यम से दुबई भेजने में भूमिका निभाई।
विदेश से जुड़े नेटवर्क की जांच
जासूसी से जुड़े मामलों में भारतीय सिम कार्ड का विदेश में इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर विषय माना जाता है। ऐसे सिम कार्ड का इस्तेमाल संचार या अन्य गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। यही वजह है कि एजेंसियां इस मामले में भारत से लेकर दुबई तक जुड़े संभावित नेटवर्क की जानकारी जुटा रही हैं।
NIA की चार्जशीट के बाद अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई होगी। जांच एजेंसी की कोशिश है कि पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और उनकी भूमिका का भी पता लगाया जाए। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि दुबई भेजे गए 12 सिम कार्ड का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और इनके जरिए किन लोगों से संपर्क किया गया था।
जांच एजेंसी के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन सिम कार्ड को हासिल करने, उन्हें भारत से बाहर भेजने और विदेश में इस्तेमाल करने की पूरी व्यवस्था के पीछे कौन लोग थे। चार्जशीट दाखिल होने के बाद इस मामले में कई और अहम खुलासे होने की संभावना है।