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गाजियाबाद में 11 वर्षीय मासूम नाले में गिरा, मौके पर ही हुई मौत; स्थानीय लोग लगाए लापरवाही के आरोप

 

नोएडा में हाल ही में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के सदमे के बीच, गाजियाबाद से एक और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। माजरा झुंडपुरा में एक 11 वर्षीय मासूम बच्चा अपने घर के पास खेलते समय लगभग ढाई फुट गहरे और चौड़े खुले नाले में गिर गया। हादसे के बाद बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक उसकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि नाले को ढकने और सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी अधिकारियों की थी, लेकिन उनका इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसी तरह की अनदेखी जारी रही तो और भी मासूम बच्चों की जान खतरे में पड़ सकती है।

घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचे। बच्चे का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और पुलिस ने प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। वहीं, लोगों का कहना है कि इलाके में खुले नाले और खराब ढांचे की समस्या पहले से ही जानी-पहचानी है, लेकिन इस ओर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि खुले नाले और खतरनाक गड्ढे बच्चों और राहगीरों के लिए सतत खतरा पैदा करते हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि ऐसे नालों और गड्ढों को तुरंत ढकने और सुरक्षित बनाने के लिए कदम उठाए जाएँ।

इस घटना ने लोगों में भारी रोष और चिंता पैदा कर दी है। माजरा झुंडपुरा के निवासी सवाल कर रहे हैं कि आखिर प्रशासन ऐसे खुले नालों की निगरानी क्यों नहीं कर रहा है और क्यों मासूमों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा रही।

यह हादसा नोएडा में हाल ही में हुई दुर्घटना की याद दिलाता है। नोएडा के सेक्टर-150 में कुछ दिन पहले सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिर गई थी। घने कोहरे के बीच हुई उस दुर्घटना में भी सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही के सवाल उठाए गए थे।

कुल मिलाकर, गाजियाबाद का यह मामला एक बार फिर यह चेतावनी देता है कि सड़क और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई में गंभीरता और तत्परता आवश्यक है। खुली नालियों, गहरे गड्ढों और अनसुरक्षित स्थानों के कारण मासूम बच्चों और राहगीरों की जान हमेशा खतरे में रहती है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि सभी खुले नाले और गड्ढे तुरंत सुरक्षित तरीके से ढके जाएँ और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त नियम और निगरानी लागू की जाए। पुलिस और प्रशासन की तत्परता ही भविष्य में इस तरह के दुर्भाग्यपूर्ण हादसों को रोक सकती है।