तमिलनाडु में सरकारी अस्पतालों में जन्मे बच्चों को मिलेंगी सोने की अंगूठियां, 220 करोड़ की योजना पर विपक्ष ने उठाए सवाल
तमिलनाडु सरकार ने सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले नवजात बच्चों के लिए एक बड़ी योजना शुरू करने की तैयारी की है। इसके तहत राज्य के सरकारी अस्पतालों में जून से सितंबर के बीच जन्मे बच्चों को सोने की अंगूठियां दी जाएंगी। सरकार ने इस योजना के लिए 1.28 लाख सोने की अंगूठियों के वर्क ऑर्डर जारी कर दिए हैं। योजना का कुल बजट करीब 220 करोड़ रुपये बताया गया है। सरकार का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में प्रसव को प्रोत्साहित करने के साथ नवजात बच्चों के परिवारों को सहायता देना है।
तमिलनाडु मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन यानी TNMSC ने शुक्रवार देर रात दो प्रमुख ज्वेलरी कंपनियों जॉयलुक्कास और कल्याण ज्वेलर्स को अंगूठियों की आपूर्ति के लिए ऑर्डर जारी किए। योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में तय अवधि के दौरान जन्मे बच्चों को ये अंगूठियां उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार की ओर से योजना को 15 सितंबर को द्रविड़ आंदोलन के प्रमुख नेता और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री सी. एन. अन्नादुरई की जयंती के अवसर पर शुरू करने की तैयारी है।
1.28 लाख बच्चों को मिलेगा लाभ
सरकार द्वारा जारी वर्क ऑर्डर के मुताबिक करीब 1.28 लाख सोने की अंगूठियां तैयार कराई जाएंगी। इनका वितरण जून से सितंबर के बीच सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले नवजात बच्चों के परिवारों को किया जाएगा। योजना के लिए सरकार ने 220 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।सरकार का मानना है कि इस तरह की योजनाओं से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जा सकता है। इसके साथ ही नवजात बच्चों के परिवारों को सरकार की ओर से एक यादगार उपहार भी मिलेगा।
टेंडर प्रक्रिया पर विपक्ष के सवाल
हालांकि योजना की घोषणा के साथ ही इसकी खरीद प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सरकार से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है। तमिलनाडु विधानसभा में भी इस योजना के टेंडर को लेकर बहस हुई।विपक्षी दलों के अनुसार, सोने की अंगूठियों की खरीद के लिए कई कंपनियों ने प्रक्रिया में भाग लिया था। ऐसे में चयन प्रक्रिया और कंपनियों को दिए गए ऑर्डर को लेकर सवाल उठाए गए हैं। विपक्ष ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि किन मानकों के आधार पर कंपनियों का चयन किया गया और इतनी बड़ी राशि की खरीद में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की गई।
विधानसभा में भी उठा मुद्दा
योजना को लेकर विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बहस हुई। विपक्षी दलों ने खरीद प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज और टेंडर की शर्तों को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि इतने बड़े सरकारी खर्च वाली योजना में खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।वहीं सरकार की ओर से योजना को जनकल्याणकारी पहल बताया जा रहा है। सरकार का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह योजना तैयार की गई है।अब 15 सितंबर को योजना की औपचारिक शुरुआत के बाद यह स्पष्ट होगा कि अंगूठियों का वितरण किस प्रक्रिया के तहत किया जाता है और पात्र बच्चों के परिवारों तक लाभ पहुंचाने के लिए सरकार क्या व्यवस्था करती है। फिलहाल 220 करोड़ रुपये की इस योजना ने स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ राज्य की राजनीति में भी चर्चा तेज कर दी है।