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अन्नामलाई का नया सियासी कदम: BJP से इस्तीफे के बाद ‘इधु नम्मा इयक्कम’ की घोषणा, वीडियो में देंखे तमिलनाडु की राजनीति में हलचल

 

तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। 2 जून 2026 को K. Annamalai ने भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद 5 जून को उन्होंने अपने नए राजनीतिक अभियान की घोषणा कर दी। इस कदम को उनके समर्थक “लीडरशिप मूवमेंट” के रूप में देख रहे हैं।

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अन्नामलाई ने अपने नए अभियान का नाम “इधु नम्मा इयक्कम” रखा है, जिसका तमिल में अर्थ है “यह हमारा आंदोलन है।” इस घोषणा के साथ ही तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक हलकों में इसे एक नए राजनीतिक संगठन के रूप में विकसित होने की शुरुआती कोशिश माना जा रहा है।सूत्रों के अनुसार, अन्नामलाई इस आंदोलन को आगे चलकर एक पूर्ण राजनीतिक पार्टी में बदल सकते हैं और 2031 के विधानसभा चुनाव में अपनी नई पार्टी के साथ मैदान में उतरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इस तरह की रणनीति की तुलना पहले हुए कुछ राजनीतिक प्रयोगों से की जा रही है, जहां आंदोलन के रूप में शुरू हुई पहल बाद में बड़ी राजनीतिक पार्टियों में बदल गई।

राजनीतिक विश्लेषकों ने इस कदम की तुलना आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) और अभिनेता Thalapathy Vijay की पार्टी TVK (तमिलगा वेत्री कझगम) की शुरुआत से की है, जहां दोनों ही राजनीतिक पहलें एक आंदोलन या जन-आंदोलन के रूप में शुरू हुई थीं और बाद में औपचारिक राजनीतिक संरचना की ओर बढ़ीं।

इस पूरे घटनाक्रम पर तमिलनाडु कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी के सांसद Manickam Tagore ने अन्नामलाई के इस कदम पर सवाल उठाते हुए इसे भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) की “प्लान-B रणनीति” बताया है। उन्होंने दावा किया कि भले ही अन्नामलाई ने खुद को भाजपा से अलग कर लिया हो, लेकिन पर्दे के पीछे उन्हें संगठनात्मक समर्थन मिलता रह सकता है।वहीं वरिष्ठ पत्रकार राजसंगीथन ने भी इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि अन्नामलाई का इस्तीफा और नया राजनीतिक मंच बनाना भाजपा की बड़ी रणनीति का हिस्सा प्रतीत हो सकता है, जिसका उद्देश्य तमिलनाडु में नए नेतृत्व को उभारना है।

हालांकि, अभी तक इस पूरे घटनाक्रम पर न तो भाजपा और न ही अन्नामलाई की ओर से विस्तृत राजनीतिक रोडमैप सार्वजनिक किया गया है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि यह कदम आने वाले वर्षों में तमिलनाडु की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि “इधु नम्मा इयक्कम” किस तरह आगे बढ़ता है और क्या यह वास्तव में एक बड़े राजनीतिक दल का रूप लेता है या फिर यह केवल एक वैचारिक आंदोलन बनकर रह जाता है।