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मोदी सरकार के फैसले पर कांग्रेस नेताओं ने बांटी मिठाइयां, वीडियो में देखें राहुल गांधी को बताया संघर्ष का नायक

 

केंद्र सरकार द्वारा जातिगत जनगणना करवाने की घोषणा के बाद गुरुवार को राजस्थान में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच जश्न का माहौल देखने को मिला। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाइयाँ खिलाकर और ढोल-ताशों की धुन पर नाचते हुए इस निर्णय का स्वागत किया। पार्टी नेताओं ने इसे राहुल गांधी की लंबी लड़ाई और संघर्ष की जीत बताया।

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कार्यकर्ताओं ने ‘राहुल गांधी जिंदाबाद’, ‘सामाजिक न्याय की जीत’, और ‘जातिगत जनगणना ज़रूरी है’ जैसे नारों के साथ केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया। इस अवसर पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष, पूर्व मंत्री, विधायक और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने मीडिया से बातचीत में कहा, “यह सिर्फ एक जनगणना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। राहुल गांधी ने वर्षों से इसकी माँग की और अब उनके संघर्ष का परिणाम देश के सामने है।” उन्होंने आगे कहा कि यह फैसला देश की वंचित, पिछड़ी और दलित आबादी के सशक्तिकरण में मील का पत्थर साबित होगा।

नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि जातिगत आंकड़ों के बिना किसी भी सामाजिक नीति को प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि जब तक यह पता नहीं चलेगा कि कौन सी जाति, वर्ग और समुदाय किस स्तर पर है, तब तक उन्हें न्यायसंगत भागीदारी नहीं दी जा सकती।

इस जश्न के मौके पर कई कार्यकर्ताओं ने पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते हुए अपनी खुशी का इजहार किया। मिठाइयों का वितरण किया गया और मुख्यालय में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। कांग्रेस का मानना है कि यह निर्णय न सिर्फ उनकी विचारधारा की पुष्टि है, बल्कि भारतीय राजनीति में एक नई बहस की शुरुआत भी करेगा।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि अब इस जनगणना को केवल घोषणा तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे जल्द से जल्द धरातल पर उतारकर क्रियान्वित किया जाए। साथ ही, उन्होंने केंद्र से मांग की कि जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं ताकि नीतियों को सामाजिक आंकड़ों के आधार पर तैयार किया जा सके।

जातिगत जनगणना लंबे समय से देश में एक संवेदनशील और बहस का विषय रहा है। कांग्रेस ने इस पर हमेशा समर्थन जताया है, जबकि अन्य राजनीतिक दलों के रुख समय-समय पर बदलते रहे हैं। अब केंद्र सरकार की इस घोषणा के बाद एक बार फिर यह मुद्दा देश की राजनीति में प्रमुखता से उभर आया है।