क्या खत्म होगी रासायनिक खाद पर निर्भरता? सरकार की नई पहल से खेत में ही बनेगी खाद
कृषि क्षेत्र में रासायनिक खाद पर बढ़ती निर्भरता को कम करने और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। इस योजना के तहत अब किसानों को खेत में ही जैविक खाद तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
“आपणों खेत–आपणी खाद” अभियान के जरिए किसानों को स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर कम्पोस्ट और जैविक खाद बनाने की तकनीक सिखाई जाएगी। इसका उद्देश्य न केवल खेती की लागत कम करना है, बल्कि भूमि की उर्वरता को भी लंबे समय तक बनाए रखना है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और उत्पादन क्षमता पर भी असर पड़ रहा है। ऐसे में जैविक खाद की ओर लौटना खेती के लिए एक टिकाऊ विकल्प माना जा रहा है।
इस अभियान के तहत किसानों को खेत में ही गोबर, कृषि अवशेष और अन्य प्राकृतिक सामग्री से खाद तैयार करने की प्रक्रिया समझाई जाएगी। इससे उन्हें बाहर से महंगी खाद खरीदने की आवश्यकता कम होगी।
Agriculture से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल सफल होती है तो इससे न केवल उत्पादन लागत घटेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
सरकार का लक्ष्य है कि इस अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों को जैविक खेती की ओर प्रेरित किया जाए और रासायनिक खाद पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम किया जाए।
कुल मिलाकर, “आपणों खेत–आपणी खाद” अभियान कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।