राजस्थान में कब पहुंचेगा मानसून? आंधी-बारिश से मिली राहत, लेकिन किसानों के लिए क्यों अहम है अल-नीनो
राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से आंधी, बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है। इससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, लेकिन मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश मानसून की दस्तक नहीं, बल्कि प्री-मानसून गतिविधियों का हिस्सा है। ऐसे में किसानों और आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर राजस्थान में मानसून कब पहुंचेगा और इस बार अल-नीनो का खरीफ फसलों पर क्या असर पड़ सकता है।
जुलाई के पहले सप्ताह में राजस्थान पहुंच सकता है मानसून
मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून के जून के अंत तक देश के उत्तरी हिस्सों की ओर बढ़ने की संभावना है। राजस्थान में मानसून का प्रवेश आमतौर पर जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई के पहले सप्ताह में होता है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस वर्ष भी मानसून प्रदेश में जुलाई के पहले सप्ताह के आसपास दस्तक दे सकता है। हालांकि इसकी सटीक तारीख मानसूनी परिस्थितियों और अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी में बनने वाली मौसमी प्रणालियों पर निर्भर करेगी।
अभी जो बारिश हो रही है, वह प्री-मानसून गतिविधि
राजस्थान के जयपुर, उदयपुर, भरतपुर, धौलपुर, भीलवाड़ा, कोटा और अन्य जिलों में हाल में हुई बारिश को प्री-मानसून गतिविधि माना जा रहा है। पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमीय तंत्र के कारण तेज आंधी, गरज-चमक और बारिश का दौर देखने को मिल रहा है।
इससे तापमान में गिरावट आई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है, लेकिन कृषि दृष्टि से यह मानसूनी बारिश का विकल्प नहीं है।
क्या है अल-नीनो और क्यों बढ़ी चिंता?
El Niño प्रशांत महासागर के सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने की स्थिति को कहा जाता है। इसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है। भारत में अल-नीनो अक्सर सामान्य से कम वर्षा और मानसून की कमजोरी से जुड़ा माना जाता है।
यदि अल-नीनो प्रभावी रहता है तो कई क्षेत्रों में बारिश कम हो सकती है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है।
खरीफ फसलों पर पड़ सकता है असर
राजस्थान में खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें बाजरा, मूंग, उड़द, मक्का, सोयाबीन, कपास और तिल हैं। इन फसलों की बुवाई काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है।
यदि मानसून समय पर नहीं पहुंचता या वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो बुवाई प्रभावित हो सकती है। इससे उत्पादन में कमी आने और किसानों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है। हालांकि कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम स्थिति मानसून की वास्तविक प्रगति पर निर्भर करेगी।
किसानों को सलाह
विशेषज्ञ किसानों को मौसम विभाग की नियमित अपडेट पर नजर रखने और बुवाई संबंधी निर्णय स्थानीय मौसम परिस्थितियों के अनुसार लेने की सलाह दे रहे हैं। कृषि विभाग भी मानसून की स्थिति को देखते हुए किसानों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर सकता है।
राहत और चुनौती दोनों
राजस्थान में जारी आंधी-बारिश ने फिलहाल गर्मी से राहत दी है, लेकिन किसानों की नजर अब मानसून की वास्तविक एंट्री पर टिकी हुई है। आने वाले कुछ सप्ताह कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे। यदि मानसून समय पर और सामान्य रहता है तो खरीफ सीजन बेहतर हो सकता है, जबकि अल-नीनो का प्रभाव बढ़ने पर चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।
फिलहाल मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में मानसून के आगमन को लेकर स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और अगले कुछ दिनों में तस्वीर और स्पष्ट हो जाएगी।