ऑनलाइन दवा खरीदने वालों के लिए चेतावनी, फर्जी लिंक और विज्ञापनों से हो रही ठगी
डिजिटल युग में जहां एक ओर ऑनलाइन सेवाओं ने जीवन को आसान बनाया है, वहीं दूसरी ओर साइबर ठगों ने भी नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। हाल ही में ऑनलाइन दवाइयां मंगाने के नाम पर हो रही ठगी के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें लोगों के बैंक खाते खाली होने तक की घटनाएं दर्ज की गई हैं।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ठग सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स और सर्च इंजन पर फर्जी विज्ञापन और लिंक के जरिए लोगों को आकर्षित करते हैं। ये लिंक देखने में असली मेडिकल स्टोर या फार्मेसी वेबसाइट जैसे लगते हैं, लेकिन वास्तव में ये नकली प्लेटफॉर्म होते हैं, जिनका उद्देश्य लोगों की निजी और बैंकिंग जानकारी चुराना होता है।
Phishing websites के जरिए ठग अक्सर सस्ते दामों पर दवा, डिस्काउंट ऑफर या तुरंत डिलीवरी का लालच देकर लोगों को फंसाते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इन लिंक पर क्लिक कर अपनी डिटेल्स या ओटीपी साझा करता है, उसका बैंक खाता खतरे में पड़ जाता है।
साइबर पुलिस का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में ऐसे मामलों में तेजी आई है, जहां लोगों ने ऑनलाइन दवाइयों के नाम पर भुगतान किया लेकिन न तो दवा मिली और न ही पैसा वापस आया। कई मामलों में पीड़ितों के खातों से अनधिकृत ट्रांजैक्शन भी हो गए।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसी भी दवा या हेल्थ प्रोडक्ट को केवल अधिकृत और सत्यापित प्लेटफॉर्म से ही खरीदा जाए। साथ ही अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए और किसी भी वेबसाइट पर अपनी बैंक या कार्ड की जानकारी दर्ज करने से पहले उसकी प्रामाणिकता जरूर जांचनी चाहिए।
साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी कहा है कि किसी भी फर्जी कॉल, मैसेज या ईमेल के जरिए अगर कोई व्यक्तिगत जानकारी मांगी जाए तो उसे तुरंत नजरअंदाज करें। सरकार की ओर से भी लोगों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर अभियान चलाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ-साथ साइबर जागरूकता भी उतनी ही जरूरी हो गई है। थोड़ी सी सावधानी और सतर्कता से ऐसे फ्रॉड से बचा जा सकता है।
फिलहाल पुलिस और साइबर सेल ऐसे गिरोहों की पहचान और उनके नेटवर्क को खत्म करने के लिए लगातार काम कर रही है। लोगों से अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन ऑफर या लिंक को तुरंत रिपोर्ट करें और दूसरों को भी सतर्क करें।