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काशी में शुरू हुई विक्रमादित्य वैदिक घड़ी, भारतीय कालगणना पर आधारित अनोखी पहल

 

धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी एक बार फिर अपनी प्राचीन परंपरा और वैज्ञानिक विरासत को लेकर चर्चा में है। बाबा विश्वनाथ के धाम में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ने रविवार को ब्रह्म मुहूर्त से समय बताना शुरू कर दिया है।

यह अनोखी घड़ी केवल सामान्य समय ही नहीं बताती, बल्कि इसे भारतीय वैदिक कालगणना और सनातन परंपराओं पर आधारित एक विशेष प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है। दावा किया जा रहा है कि यह घड़ी समय के साथ-साथ भारतीय पंचांग और पारंपरिक गणना पद्धति से जुड़ी कई जानकारियां भी प्रदर्शित करती है।

Varanasi: यह पहल काशी को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से और अधिक विशिष्ट बनाती है। इसे पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के मेल के रूप में देखा जा रहा है, जो भारतीय कालगणना को नए स्वरूप में प्रस्तुत करती है।

जानकारी के अनुसार, यह घड़ी विश्व में अपनी तरह की दूसरी ऐसी प्रणाली बताई जा रही है, जो पूरी तरह से भारतीय वैदिक गणना पर आधारित है। इससे पहले इसी तरह की एक घड़ी मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थापित की गई थी, जो महाकाल की नगरी के रूप में प्रसिद्ध है।

इस अनूठी घड़ी का उपहार 3 अप्रैल को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिया था। इसके बाद इसे काशी में स्थापित किया गया, जहां अब यह आम लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है।

Uttar Pradesh: इस पहल को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में इस घड़ी को देखने और समझने को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें भारतीय परंपरागत ज्ञान प्रणाली को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद कर सकती हैं और सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत बना सकती हैं।