उत्तराखंड समाज को आवंटित जमीन निरस्तीकरण पर हाईकोर्ट की रोक, भजनलाल सरकार के फैसले को चुनौती
राजस्थान में उत्तराखंड समाज को रियायती दर पर आवंटित जमीन को निरस्त करने के राज्य सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। यह जमीन पिछली गहलोत सरकार के कार्यकाल में आवंटित की गई थी, जिसे बाद में भजनलाल सरकार ने निरस्त करने का आदेश जारी किया था। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले में नई स्थिति बन गई है।
सरकार के फैसले को दी गई थी चुनौती
जानकारी के अनुसार, पूर्ववर्ती सरकार के समय उत्तराखंड समाज को सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए रियायती दर पर भूमि आवंटित की गई थी। बाद में सत्ता परिवर्तन के बाद भजनलाल सरकार ने इस आवंटन को निरस्त करने का निर्णय लिया।
सरकार के इस आदेश के खिलाफ संबंधित पक्ष ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और निरस्तीकरण आदेश को चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के जमीन निरस्तीकरण आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश के बाद फिलहाल जमीन आवंटन को लेकर यथास्थिति बनी रहेगी।
हाईकोर्ट के इस फैसले से उत्तराखंड समाज को राहत मिली है, जो सरकार के निर्णय के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा था।
आवंटन को लेकर शुरू हुआ था विवाद
यह मामला जमीन आवंटन की प्रक्रिया और उसके औचित्य को लेकर विवादों में आया था। राज्य सरकार की ओर से आवंटन निरस्त करने के पीछे कुछ कारण बताए गए थे, जबकि समाज की ओर से इसे नियमों के तहत किया गया आवंटन बताया गया।
अब मामले में आगे की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
आगे की सुनवाई पर टिकी नजर
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब सभी की नजर मामले की अगली सुनवाई पर है। कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जमीन का आवंटन बरकरार रहेगा या सरकार का निरस्तीकरण आदेश प्रभावी होगा।
फिलहाल हाईकोर्ट की रोक के चलते उत्तराखंड समाज को आवंटित जमीन पर सरकार की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकेगी। मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।