जयपुर में चुनावी ड्यूटी पर टीचर को कार्यमुक्त करने पर हंगामा, फुटेज में देंखे स्कूल में घुसे 40-50 लोग; प्रिंसिपल को धमकी देने का आरोप
जयपुर के सांगानेर इलाके में स्थानीय निकाय चुनाव में एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका की ड्यूटी लगाए जाने के बाद उन्हें कार्यमुक्त करने को लेकर हंगामे का मामला सामने आया है। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मंदाऊ की प्रधानाचार्य सीमा चौधरी ने शुक्रवार को पुलिस में शिकायत दी। शिकायत के अनुसार, 2 सितंबर की सुबह करीब 10 बजे 40-50 लोग बिना अनुमति स्कूल परिसर में घुस आए और हंगामा करने लगे। प्रधानाचार्य ने कुछ लोगों पर उनके चेंबर में घुसने की कोशिश करने और विरोध करने पर एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया है।
चुनावी ड्यूटी के लिए शिक्षिका को किया था कार्यमुक्त
प्रधानाचार्य की शिकायत के मुताबिक, स्कूल में शारीरिक शिक्षक शिखा मीणा की स्थानीय निकाय चुनाव में ड्यूटी लगाई गई थी। जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से उन्हें 1 सितंबर को उपस्थिति देने के लिए स्कूल से कार्यमुक्त किया गया था।शिकायत के अनुसार, इसी मामले को लेकर अगले दिन कुछ लोग स्कूल पहुंच गए। प्रधानाचार्य का आरोप है कि करीब 40-50 लोग स्कूल परिसर में बिना अनुमति के दाखिल हुए और हंगामा करने लगे।
पढ़ाई के दौरान स्कूल में घुसने का आरोप
प्रधानाचार्य ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि घटना के समय स्कूल में शिक्षक और विद्यार्थी अपनी-अपनी कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान बड़ी संख्या में लोगों के स्कूल परिसर में आने से वहां माहौल बिगड़ गया।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग प्रधानाचार्य के चेंबर में भी घुसने लगे। सीमा चौधरी के मुताबिक, उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी दी गई।
कुर्सियों पर जबरन बैठने और वीडियो बनाने का आरोप
शिकायत के अनुसार, हंगामे के दौरान कुछ लोग प्रधानाचार्य के चेंबर में रखी कुर्सियों पर जबरन बैठ गए। वहीं, एक व्यक्ति द्वारा पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाए जाने का भी आरोप लगाया गया है।प्रधानाचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने स्कूल की कक्षाओं में घुसने का प्रयास किया। हालांकि, शिकायत में लगाए गए इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस से शिकायत, जांच का इंतजार
घटना के संबंध में प्रधानाचार्य सीमा चौधरी ने शुक्रवार को पुलिस को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। मामला स्थानीय निकाय चुनाव की ड्यूटी से जुड़ा होने के कारण स्कूल प्रशासन और निर्वाचन प्रक्रिया के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि स्कूल परिसर में कितने लोग पहुंचे थे, हंगामे की वास्तविक वजह क्या थी और प्रधानाचार्य के साथ धमकी या अभद्रता के आरोपों में किसकी भूमिका रही।इस घटना ने चुनावी ड्यूटी में लगाए गए सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा और स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। चुनावी प्रक्रिया के दौरान सरकारी कर्मचारियों को निर्धारित ड्यूटी के लिए कार्यमुक्त करना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इसे लेकर स्कूल में इस तरह का विवाद सामने आना चर्चा का विषय बन गया है।