वागड़ अंचल में होली पर अद्भुत परंपरा: भचड़िया गांव में श्रद्धालुओं ने अंगारों पर नंगे पैर चलकर निभाई सदियों पुरानी परंपरा
राजस्थान के वागड़ अंचल में होली के त्योहार को इस बार भी अनोखी आस्था और भक्ति के साथ मनाया गया। बांसवाड़ा जिले के भचड़िया गांव में होलिका दहन के बाद श्रद्धालुओं ने धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर अपनी सदियों पुरानी परंपरा को निभाया। यह दृश्य न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि पर्यटकों और मीडिया के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना।
जानकारी के अनुसार, भचड़िया गांव में होलिका दहन के तुरंत बाद ग्रामीण और श्रद्धालु आग के बीच से गुजरते हैं। इस परंपरा को निभाना विश्वास और आस्था का प्रतीक माना जाता है। स्थानीय लोग मानते हैं कि धधकते अंगारों पर चलने से आत्मा शुद्ध होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस अनोखी परंपरा को सदियों से पीढ़ी दर पीढ़ी निभाया जा रहा है।
गांव के लोग बताते हैं कि यह परंपरा किसी धार्मिक अनुष्ठान या त्योहार से जुड़ी हुई नहीं बल्कि स्थानीय संस्कृति और आस्था का अभिन्न हिस्सा है। होली के दिन न केवल आग पर चलना बल्कि रंगों, गीतों और ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाना भी विशेष महत्व रखता है। इस दौरान पूरे गांव में उत्सव का माहौल बना रहता है और आसपास के क्षेत्रों से भी लोग इसे देखने आते हैं।
स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि कोई हादसा न हो। आग के मार्ग के किनारे सुरक्षा कर्मी और स्थानीय लोग मौजूद रहते हैं, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित रूप से इस परंपरा का पालन कर सकें। इसके साथ ही मेडिकल टीम भी तैनात की गई है, ताकि किसी आकस्मिक घटना या चोट की स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि भचड़िया गांव की यह परंपरा स्थानीय संस्कृति और विश्वास का अद्भुत उदाहरण है। यह दर्शाता है कि राजस्थान में त्योहार सिर्फ उत्सव तक सीमित नहीं हैं बल्कि इनमें आस्था, परंपरा और सामाजिक जुड़ाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आग पर चलने जैसी परंपराएं समाज में साहस, धैर्य और विश्वास की भावना को मजबूत करती हैं।
श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने बताया कि यह परंपरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी गांव के लिए एक पहचान बन चुकी है। पर्यटक और फोटोग्राफर इस अनोखी परंपरा को देखने और कैद करने के लिए दूर-दूर से आते हैं, जिससे स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।
भचड़िया गांव की यह होली परंपरा वागड़ अंचल की सांस्कृतिक विरासत और लोकधरोहर का हिस्सा है। जैसे-जैसे समय बदल रहा है, गांव के लोग इस परंपरा को सुरक्षित रखने और नई पीढ़ी तक पहुँचाने में लगे हुए हैं। यह घटना यह भी दर्शाती है कि राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर में अद्भुत रीतियां और विश्वास आज भी जीवित हैं।
इस प्रकार, वागड़ अंचल में होली का यह उत्सव न केवल रंगों और खुशियों का प्रतीक है, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का भी संदेश देता है।