×

राजस्थान में अनोखी पहल: शादी के कार्ड की जगह पर्यावरण का संदेश, सबलपुरा के रामूराम महला की पहल चर्चा में

 

शादी के सीजन में जहां लोग महंगे और चटक रंगों वाले कागज के निमंत्रण पत्र छपवाने पर लाखों रुपये खर्च कर देते हैं, वहीं राजस्थान में एक अनोखी पहल ने सबका ध्यान खींच लिया है। कुचामन सिटी के पास स्थित सबलपुरा गांव के निवासी रामूराम महला ने परंपरागत शादी कार्ड की जगह पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाला अनूठा कदम उठाया है।

रामूराम महला ने अपनी इस पहल से न केवल रिश्तेदारों और आमंत्रित मेहमानों का दिल जीता, बल्कि समाज को एक मजबूत संदेश भी दिया है कि खुशियों के अवसर पर भी प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाई जा सकती है।

जानकारी के अनुसार, उन्होंने शादी के लिए पारंपरिक कागज के कार्ड छपवाने के बजाय पर्यावरण अनुकूल विकल्प चुना। आमतौर पर विवाह समारोह में हजारों कार्ड छपवाए जाते हैं, जिनमें मोटे कागज, प्लास्टिक कोटिंग और चमकदार रंगों का इस्तेमाल होता है। इससे पेड़ों की कटाई और कचरे में वृद्धि होती है। रामूराम महला ने इस परंपरा को तोड़ते हुए कम खर्च में ऐसा तरीका अपनाया, जिससे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

उनकी पहल की चर्चा अब आसपास के गांवों से लेकर पूरे प्रदेश में हो रही है। लोगों का कहना है कि जहां एक ओर शादी-ब्याह में दिखावे पर भारी खर्च किया जाता है, वहीं इस तरह की सोच समाज के लिए प्रेरणादायक है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि बड़े पैमाने पर लोग ऐसे कदम उठाएं तो कागज की खपत में कमी आ सकती है और पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा। शादी जैसे बड़े आयोजनों में डिजिटल निमंत्रण, पौधारोपण या पुन: उपयोग योग्य सामग्री का प्रयोग एक सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

रामूराम महला का कहना है कि शादी केवल दो परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि समाज के सामने उदाहरण पेश करने का अवसर भी है। उन्होंने इस पहल के माध्यम से संदेश दिया कि परंपराओं को निभाते हुए भी उन्हें समय के अनुरूप बदला जा सकता है।

सबलपुरा गांव में इस अनूठी पहल को लेकर लोगों में उत्साह है। कई ग्रामीणों ने भविष्य में इसी तरह पर्यावरण अनुकूल विवाह आयोजन करने की इच्छा जताई है।

आज जब पर्यावरण संरक्षण एक वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है, ऐसे में राजस्थान के एक छोटे से गांव से उठी यह पहल निश्चित रूप से एक सकारात्मक संदेश देती है कि बदलाव की शुरुआत कहीं से भी हो सकती है।