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उदयपुर का अमरखजी क्षेत्र बनेगा तेंदुओं का सुरक्षित आश्रय, ईको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा

 

उदयपुर शहर के पास अरावली की पहाड़ियों में फैला अमरखजी क्षेत्र अब तेंदुओं के संरक्षण और प्रकृति आधारित पर्यटन के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। करीब 74 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र को वन्यजीव संरक्षण और ईको-टूरिज्म के लिहाज से विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है।

इस परियोजना के तहत लगभग 15 करोड़ रुपए की लागत से संरक्षण, निगरानी और पर्यटन विकास से जुड़े विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। वन विभाग द्वारा क्षेत्र में तेंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसके तहत निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है, जिसमें कैमरा ट्रैप, पेट्रोलिंग और अन्य सुरक्षा उपाय शामिल हैं।

अमरखजी क्षेत्र अरावली की प्राकृतिक जैव विविधता से समृद्ध है और यहां पहले से ही तेंदुओं की अच्छी खासी मौजूदगी है। ऐसे में इसे संरक्षित क्षेत्र के रूप में विकसित करने से वन्यजीवों को सुरक्षित आवास मिलेगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को भी कम करने में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही, ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाएं बनाई जा रही हैं। पर्यटकों के लिए प्रकृति पथ (नेचर ट्रेल), व्यू पॉइंट, गाइडेड सफारी और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे लोग प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को करीब से देख सकें।

वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से न केवल वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।

परियोजना के तहत पर्यावरण संतुलन का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, ताकि विकास कार्यों के साथ-साथ प्राकृतिक संरचना को नुकसान न पहुंचे। स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे संरक्षण प्रयासों को और प्रभावी बनाया जा सके।

कुल मिलाकर, अमरखजी क्षेत्र का यह विकास उदयपुर को वन्यजीव संरक्षण और ईको-टूरिज्म के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।