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उदयपुर में पिता ने बेटी के जीवित रहते ही आयोजित किया मृत्युभोज, सोशल और पारिवारिक विवाद बढ़ा

 

राजस्थान के उदयपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और सामाजिक रूप से संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां एक पिता ने अपनी बेटी के जीवित रहते हुए ही उसका शोक संदेश छपवाया और मृत्युभोज का आयोजन कर दिया।

सूत्रों के अनुसार, बेटी की शादी को महज दो महीने ही हुए थे। इसके बाद बेटी ने अपने पति को छोड़कर प्रेमी के साथ जाने का निर्णय लिया। पिता इस घटना से इतना आहत हुआ कि उसने बेटी से सभी रिश्ते तोड़ लिए और उसे अपनी संपत्ति की वसीयत से भी बेदखल कर दिया।

पिता ने स्थानीय मीडिया और सामुदायिक लोगों के माध्यम से शोक संदेश जारी किया और बेटी के लिए मृत्युभोज आयोजित कर अपने गुस्से और आहत भाव को सार्वजनिक रूप दिया। इस कदम ने न केवल परिवार में तनाव बढ़ाया बल्कि सामाजिक और नैतिक बहस को भी जन्म दिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले सामाजिक संवेदनशीलता और पारिवारिक मूल्यों पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने बताया कि परिवारिक विवाद में कानूनी और नैतिक उपायों का पालन करना बेहद जरूरी है। ऐसा कदम न केवल पीड़ित बेटी के लिए मानसिक दबाव बढ़ाता है बल्कि समाज में विवाद और आलोचना को भी जन्म देता है।

स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता इस घटना पर आक्रोश और चिंता व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति के जीवित रहते मृत्युभोज आयोजित करना पूरी तरह अनुचित और असंवेदनशील कदम है।

पुलिस या प्रशासन ने फिलहाल इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई की पुष्टि नहीं की है, लेकिन यह घटना उदयपुर में पारिवारिक और सामाजिक विवाद की गर्मी बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे संवेदनशील मामलों में शांति और कानूनी मार्ग अपनाएं, ताकि परिवार और समाज दोनों में तनाव कम किया जा सके।

यह मामला राजस्थान में पारिवारिक विवाद, संपत्ति विवाद और सामाजिक चेतना के बीच की जटिलताओं को उजागर करता है। ऐसे विवादों में समझौता, संवाद और कानूनी सहारा ही स्थायी समाधान हो सकता है।