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राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में फिर दो प्रसूताओं की मौत, भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल पर उठे सवाल

 

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल का है, जहां बुधवार (29 जुलाई) देर रात दो प्रसूताओं की मौत हो गई। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और मातृ स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, दोनों महिलाओं को प्रसव के लिए महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई और देर रात दोनों ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप भी लगाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

दो प्रसूताओं की मौत की खबर फैलते ही अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। प्रारंभिक स्तर पर मौत के कारणों का पता लगाने के लिए मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दोनों मामलों की विस्तृत जांच कराई जाएगी। यदि जांच में इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही या निर्धारित प्रोटोकॉल का उल्लंघन सामने आता है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए समय पर इलाज, पर्याप्त संसाधन, प्रशिक्षित चिकित्सा स्टाफ और बेहतर निगरानी व्यवस्था बेहद जरूरी है।

वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दोनों मामलों की परिस्थितियों की समीक्षा की जा रही है और मौत के वास्तविक कारणों का पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मेडिकल जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करने की मांग उठाई है। स्वास्थ्य विभाग ने भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।