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त्राटक क्रिया से दिमाग तेज और मन शांत होता है — संत प्रेमानंद महाराज के अनुसार प्राचीन ध्यान तकनीक

 

राजस्थान और देशभर में धर्म एवं योग‑आध्यात्म से जुड़े कार्यक्रमों में त्राटक क्रिया (Tratak Kriya) को एकाग्रता और मानसिक शांति बढ़ाने वाली योगिक विधि के रूप में चर्चा में लाया जा रहा है। यह प्राचीन तकनीक न केवल आंखों की शक्ति को बढ़ाती है बल्कि मन की सोच, ध्यान क्षमता और मानसिक स्पष्टता को तेज करने में भी मदद करती है।

📌 त्राटक क्रिया क्या है?

त्राटक क्रिया एक योगिक अभ्यास है जिसमें व्यक्ति बिना पलकें झपकाए किसी एक बिंदु या दीपक की लौ को ध्यान से देखता है। इसे शांत, अंधेरे या कम रोशनी वाले कमरे में किया जाता है ताकि मन and ध्यान केंद्रित रहे।

🧠 मानसिक और आंखों पर प्रभाव

  • एकाग्रता और स्मृति: त्राटक से मन की चंचलता कम होती है और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बेहतर होती है, जिससे याददाश्त में सुधार होता है।

  • मानसिक स्पष्टता: नियमित अभ्यास से मन अधिक स्थिर और स्पष्ट बनता है, जिससे तनाव कम होता है और निर्णय क्षमता बढ़ती है।

  • आंखों की शक्ति: आंखों की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं, रोशनी बेहतर होती है और आंखों से जुड़ी थकान कम होती है।

  • आंतरिक संतुलन: योगिक मान्यता के अनुसार त्राटक अभ्यास से अंदरूनी सकारात्मक ऊर्जा जागृत होती है, जिससे मन शांत और स्थिर रहता है।

📿 कैसे करें त्राटक क्रिया?

  1. शांत और स्थिर जगह पर आराम से बैठें।

  2. सामने आंखों के स्तर पर दीपक या स्थिर बिंदु रखें।

  3. बिना पलक झपकाए उसे कुछ समय तक ध्यान से देखें।

  4. आंखों में पानी आने पर उन्हें बंद करें और लौ की छवि को मन में ध्यान लगाएँ।

  5. रोज़ाना कुछ मिनट अभ्यास से शुरुआत करें।

📌 प्रेमानंद महाराज का सुझाव

ध्यान करने में अक्सर लोगों को भटकता मन परेशानी देता है। इस स्थिति को बेहतर बनाने के लिए संत प्रेमानंद महाराज ने कहा है कि त्राटक क्रिया एक सरल और प्रभावी उपाय है — यह ध्यान को स्थिर करने में मदद करती है और रोजमर्रा के तनाव से मुक्ति दिलाती है।

🔹 मनोवैज्ञानिक और योगिक दृष्टिकोण दोनों से यह माना जाता है कि त्राटक से मन का एकाग्र केंद्र मजबूत होता है और यह ध्यान और मानसिक संतुलन दोनों को बढ़ावा देता है।