तीनों नवनियुक्त कुलगुरुओं के कार्यकाल की स्थिति स्पष्ट, 3 साल या 70 वर्ष की उम्र तक रहेगा पद
राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी आदेश में तीनों नवनियुक्त कुलगुरुओं के कार्यकाल को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। आदेश के अनुसार, संबंधित विश्वविद्यालयों में नियुक्त किए गए कुलगुरुओं का कार्यकाल कार्यभार संभालने की तारीख से अधिकतम तीन वर्ष तक रहेगा। हालांकि, यदि कोई कुलगुरु तीन वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले 70 वर्ष की आयु पूरी कर लेता है तो उनका कार्यकाल उसी समय समाप्त माना जाएगा।
कार्यभार संभालने की तारीख से होगी गणना
राज्यपाल सचिवालय के आदेश के मुताबिक कुलगुरुओं के कार्यकाल की गणना उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से की जाएगी। यानी नियुक्ति आदेश जारी होने की तारीख के बजाय जिस दिन संबंधित कुलगुरु विश्वविद्यालय में अपना कार्यभार संभालेंगे, उसी दिन से तीन वर्ष की अवधि शुरू मानी जाएगी।इस व्यवस्था से कुलगुरुओं के कार्यकाल की अवधि को लेकर किसी तरह की अस्पष्टता नहीं रहेगी और पदभार ग्रहण करने की तारीख के आधार पर कार्यकाल निर्धारित किया जा सकेगा।
70 वर्ष की आयु की शर्त भी लागू
आदेश में कुलगुरुओं की अधिकतम आयु सीमा को भी स्पष्ट किया गया है। यदि किसी नवनियुक्त कुलगुरु की आयु तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने से पहले 70 वर्ष हो जाती है, तो उनका कार्यकाल 70 वर्ष की आयु पूरी होने पर समाप्त माना जाएगा।इसका मतलब है कि कुलगुरु का कार्यकाल तीन वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, उसी आधार पर निर्धारित होगा।
दोनों में से जो पहले होगा, वहीं कार्यकाल समाप्त
राज्यपाल सचिवालय के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि तीन वर्ष की निर्धारित अवधि और 70 वर्ष की आयु में से जो भी पहले पूरी होगी, उसी समय संबंधित कुलगुरु का कार्यकाल समाप्त माना जाएगा। इससे विश्वविद्यालयों में कुलगुरुओं के कार्यकाल को लेकर नियम की स्थिति साफ हो गई है।राज्यपाल सचिवालय का यह आदेश तीनों नवनियुक्त कुलगुरुओं पर लागू होगा। अब संबंधित विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक प्रक्रिया भी इसी निर्धारित अवधि के अनुसार आगे बढ़ेगी।